फिरोज खान / मुंबई
मुंबई से सटे भिवंडी में एक ४ मंजिला अवैध इमारत गिरने से १० लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में १२ से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से ४ की हालत गंभीर बताई जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इमारत बिना नक्शा पास कराए, बिना स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट और घटिया सामग्री से बनाई गई थी। सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि इमारत गिरने की खबर सुनते ही बिल्डर देश छोड़कर विदेश फरार हो गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बिल्डर सोमवार दोपहर को ही फरार हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरोपी बिल्डर पिछले ५ सालों में भिवंडी में ऐसी ३ और अवैध इमारतें बना चुका है। हर बार शिकायत के बाद सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडा कर दिया जाता था।
ठेकेदार की मौत: हादसा या साजिश?
निर्माण कार्य देख रहे ठेकेदार की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है, लेकिन इस मौत ने जांच को और उलझा दिया है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ठेकेदार की मौत इमारत गिरने से पहले हुई या बाद में। अधिकारियों को शक है कि कहीं यह सबूत मिटाने की कोशिश तो नहीं। ठेकेदार के मोबाइल, बैंक ट्रांजैक्शन और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
घटिया सामग्री का किया गया था इस्तेमाल
भिवंडी में एक ४ मंजिला अवैध इमारत गिरने के मामले में स्थानीय लोगों और बचे हुए किरायेदारों का कहना है कि निर्माण में निम्न गुणवत्ता का सीमेंट और सरिया इस्तेमाल किया गया। पिलर पतले थे और फाउंडेशन कमजोर था। किसी भी सरकारी एजेंसी ने स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं किया। इलाके के लोगों का सीधा आरोप है कि बिना पानी और बिजली कनेक्शन के कोई इमारत खड़ी नहीं हो सकती। हर मंजिल बनने पर संबंधित अधिकारियों को ‘हफ्ता’ पहुंचाया जाता था। शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन के खोखले दावे
भिवंडी निजामपुर मनपा के आयुक्त ने कहा है कि शहर में सभी अवैध निर्माणों की सूची बनाकर १५ दिनों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस तरह के आदेश पहले भी हो चुके हैं। मामला ठंडा होते ही हालात जस के तस हो जाते हैं। इस मामले में पुलिस ने बिल्डर, ठेकेदार के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। फोरेंसिक टीम ने मलबे से सैंपल लिए हैं, ताकि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता जांची जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि १० जानें चली गर्इं, दर्जनों परिवार बेघर हो गए। लेकिन सवाल वही है, आखिर कब तक? जब तक बिल्डर-माफिया, भ्रष्ट अधिकारी और लचर कानून की तिकड़ी नहीं टूटेगी, तब तक भिवंडी में कंक्रीट के मकान नहीं, मौत के जाल बनते रहेंगे। लोगों को अब मुआवजा नहीं, इंसाफ और सख्त सजा चाहिए।
हादसे पर लीपापोती
भिवंडी में यह पहला हादसा नहीं है। २०१७ में ७ मंजिला इमारत गिरने से ३८ लोगों की मौत हुई थी। २०२१ में भी एक ३ मंजिला इमारत ढही थी, जिसमें ३ लोगों ने जान गंवाई थी। हर बार जांच कमेटी बनती है, पीड़ितों को मुआवजा मिलता है, कुछ अधिकारियों का तबादला होता है और फिर सब भुला दिया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता रफीक शेख कहते हैं, ‘यहां नियम कायदे सिर्फ फाइलों में हैं। जमीन पर पैसा बोलता है। जब तक दोषियों को जेल नहीं होगी, ये हत्याएं रुकेंगी नहीं।’
