सूफी खान
ईरान हिमायती इराकी इस्लामिक रजिस्टेंस या मुकावमती संगठनो ने इराक सरकार को ७ अगस्त तक का अल्टिमेटम दे दिया है। उनका कहना है कि अगर इराकी सरकार सऊदी अरब और अमेरिका के जरिए मिलकर किए गए हमलों का जवाब नहीं देती है तो अमेरिका और सऊदी अरब के खिलाफ हम ऐसे हमले करेंगे, जिसके जख्म दर्दनाक होंगे। इराक में मौजूद ईरानी रजिस्टेंस ने ये भी साफ कर दिया है कि इराक में चल रहे इमाम हुसैन के अरबइन तक रजिस्टेंस कोई जवाबी हमला नहीं करेगा, क्योंकि दुनियाभर से करोड़ों मुस्लिम इस वक्त इराक में हैं।
गौरतलब है कि इराक में मौजूद पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स यानी हशदुश्शाबी २०१४ में उस वक्त वजूद में आई थी, जब आएसआईएस या दाइश के आतंकवादियों ने इराक पर हमला कर दिया था। उस वक्त दाइश के खूंखार दहशतगर्दों का हमला इतना खतरनाक था कि इराकी फोर्स अपनी पोस्ट और चौकियां छोड़कर भाग खड़ी हुई थी। जिन पर आईएसआईएस ने कब्जा कर डाला था। साल २०१४ में नार्थ इराक में ये अटैक हुआ था, जिसमें मोसूल, तिकरित और इरबिल जैसे बड़े शहरों पर दहशतगर्दों ने कब्जा कर लिया था। आतंकी बगदाद की तरफ बढ़ रहे थे और कर्बला एवं नजफ पर कब्जे की भी तैयारी थी। ऐसी सूरत में इराक के एक बड़े मजहबी रहनुमा आयतुल्लाह सिस्तानी ने फतवा दिया कि इराकी अवाम घरों से निकले, जिनमें युवाओं की तादाद बहुत बड़ी थी। इन्हीं ने अलग-अलग ग्रुप्स बनाए थे, जो बाद में पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स यानी हशदुश्शाबी कहलाया। इस मिलिशिया ने आईएसआई एस को इराक से खदेड़ दिया था। साल २०१६ में इराकी पार्लियामेंट ने कानून बनाकर पीएमएफ को इराकी सिक्योरिटी और आर्मी का हिस्सा बना लिया। लेकिन अब इराक की नई सरकार चाह रही है कि पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स अपने हथियार इराकी फौज को सौंप दे और बाकायदा इराकी फौज में शामिल हो जाए। ३० सितंबर २०२६ इसकी डेडलाइन है, लेकिन पीएमएफ इस पर तैयार नहीं है। ताजा हालात में पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स ने ७ अगस्त तक की डेडलाइन इराकी सरकार को दी है कि आप सऊदी अमेरिका के हमलों का जवाब दीजिए, वर्ना हम अपने अंदाज में जवाब देंगे। पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स में कताइब हिजबुल्लाह, कताइबे सैयदुश्शोहदा, असाहिबे अहलल हक और अलदैम हरकतुल नुजबा जैसे आधा दर्जन ग्रुप शामिल हैं, जिनके पास एडवांस हथियार हैं और ये ईरान के समर्थक हैं। इनके पास टैंक और ड्रोन का बड़ा स्टाक भी है। अगर जवाबी हमला हुआ तो हालात और खराब होंगे।
इराक के पीएम अली अल जैदी ने अपना सऊदी अरब दौरा रद्द कर दिया है, वहीं इराकी संसद के दर्जनों सांसदों ने सऊदी अरब के साथ सभी डिप्लोमैटिक रिश्ते खत्म करने और सऊदी पर जवाबी हमला करने की मांग की है।
उधर सऊदी हमलों में मारे गए इराकी जवानों का बदला लेने की तैयारी भी तेज है, इराक की आधा दर्जन से ज्यादा ईरान समर्थक मिलिशिया ने खुलकर जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं और अपने लड़ाकों को तैयार रहने के ऑर्डर दिए हैं। इराक में इमाम हुसैन का चेहल्लुम मनाने के लिए दुनियाभर से अकीदतमंद पहुंचे हैं, हर साल ३ से ४ करोड़ लोग इराक में इस मौके पर जमा होते हैं। आरोप लग रहा है कि जंग को बढ़ाने के लिए अमेरिका के समर्थन से सऊदी अरब जानबूझकर यमन और इराक में ईरानी रजिस्टेंस पर हमलावर है। अमेरिका की कोशिश है कि किसी भी तरह इस जंग में अरब खित्ते में मुस्लिम देश खुल कर आ जाएं। सबसे बड़े देश सऊदी के आने से बाकी मुल्क भी धीरे-धीरे ईरान और उसके एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं।
