मुख्यपृष्ठस्तंभसीधा सवाल : महायुति राज में अपराधी बेखौफ!

सीधा सवाल : महायुति राज में अपराधी बेखौफ!

-क्या पुलिस के पास तड़ीपार गुंडों को ट्रैक करने की कोई ठोस प्रणाली नहीं है?

सुरेश गोलानी

राज्य में एक दौर ऐसा था जब अपराधी को ‘तड़ीपारी’ की सजा मिलती तो वह हमेशा के लिए शहर/ जिला छोड़ देता या फिर सालों तक वहां नजर नहीं आता। लेकिन महायुति सरकार के राज में निष्कासन आदेश (तड़ीपारी / एक्सटर्नमेंट)) सिर्फ एक कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है, जिसका गुंडे और बदमाश खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए अवैध घर वापसी कर रहे हैं। पकड़े गए तो ठीक वरना ये असामाजिक तत्व बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ सालों में मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा तड़ीपारों को आदेशों को भंग करके शहर की सीमा में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ज्यादातर मामलों में तड़ीपार गुंडे आदेश पारित होने के कुछ ही दिनों बाद शहर में नजर आने लगते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले १५ दिनों में मीरा-भायंदर से ३ गुंडे तड़ीपारी आदेश का भंग करने के आरोप में पकड़े गए हैं। लगातार हो रहे इन अवैध घर वापसी के मामलों से यह सवाल उठता है कि- क्या पुलिस के पास तड़ीपार गुंडों को ट्रैक करने या नजर रखने की कोई ठोस प्रणाली नहीं है?
तड़ीपारी की प्रक्रिया
स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारी सक्रिय अपराधियों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ सबूतों के साथ एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करते है, जिसकी संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा समीक्षा की जाती है। सक्षम प्राधिकारी (जैसे डीसीपी या जिला मजिस्ट्रेट) आरोपी को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजते हैं और अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए सुनवाई करते हैं। आरोप सही पाए जाने पर आरोपी को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, १९५१ की धाराओं के तहत ६ महीने से लेकर २ साल तक के लिए संबंधित और आसपास के जिलों से बाहर (तड़ीपार) रहने के आदेश दिए जाते हैं।
हिट स्क्वॉड
देश में कई अन्य राज्यों के पुलिस विभागों ने समर्पित ‘हिट स्क्वाड’ गठित किया है, जिससे जुड़े पुलिसकर्मी कुख्यात बदमाश- विशेष रूप से शहर की सीमा से बाहर निकाले गए या महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (एमपीडीए) जैसे कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किए गए गुंडों का फोन नंबर डेटाबेस बनाकर वर्तमान ठिकानों पर नजर रखते हैं। हालांकि, मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय के पास ऐसी कोई ठोस प्रणाली है या नहीं? इस पर अभी रहस्य बना बना हुआ है।
पकड़े जाने पर कार्रवाई
तड़ीपारी आदेश भंग करने के आरोप में पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम-१९५१ की धारा १४२ (प्रतिबंधित क्षेत्र से बिना अनुमति प्रवेश) के तहत एक अतिरिक्त अपराध दर्ज कर लिया जाता है और फिर से उन्हें शहर और प्रतिबंधित जिलों से बाहर भेज दिया जाता है।

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