मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाअब के सावन घर आ जा!

अब के सावन घर आ जा!

अब के सावन घर आ जा
घर आ जा सजनवा
अबके सावन घर आ जा।
राह तक -तक हार गई पिया
अखियां मेरी क्लांत हुई है
धीरज मेरा चूक रहा है
अब के सावन घर आ जा
आ जा पिया मोरे सावन आया
तू भी घर आ जा।
जब -जब बरसे काले बदरवा
मेघ मल्हार, मिल सब जलधर गाएं
ताल कहरवा की थाप पड़ी है
सावन की लगी लम्बी झड़ी है
मन में मिलन की आस जगी है
आकर पिया मेरी आस पुरा जा
अब के सावन पिया घर आ जा
आ जा मोरे पिया घर आ जा।
दामिनी संग मेरी लालसा दमके
विद्युत सी सिहरन तन में दौड़े
अधरों पर मेरे कम्पन छाए
धड़कन हिया की बढ़ती जाए
आकर मुझे सहज करा जा
आ जा पिया सावन आया…
तू भी पिया घर आ जा।
कजरी सुन सुन मन बौराए
अखियां अविरल जल बरसाएं
मांग सिंदूर मुझे मुंह चिढ़ाएं
माथे बिंदिया बिदकती जाए
आ कर मेरा सूनापन मिटा जा
पिया मेरे अब के सावन घर आ जा
घर आजा, सावन आया तू भी आ जा।
-बेला विरदी

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