कजरी

हरे रामा बम्बई के सुनि ला कहानी
भरल बा पानी हे हरी…!
“दादर” डूबल “माहिम”/ डूबल
“माटुंगा” संग “साइन” डूबल
हरे रामा डूबल बा कुर्ला कमानी
भरल बा पानी हे हरी…!
सड़क समंदर गली बा नाला
गटर में मनई तक बहि जाला
हरे रामा आइल बा जैईसे सुनामी
भरल बा पानी हे हरी…!
“फ़ीट नाइंटी” राम दुहाई
“साकीनाका” कइसे जाई
हरे रामा टूटल “सड़क खैरानी”
भरल बा पानी हे हरी…!
बिजुरी चमकै बादर बोलै
ट्रेन जाम बस रुकि रुकि डोलै
हरे रामा लहरे उहाँ “मालवानी”
भरल बा पानी हे हरी…!
-एड. राजीव मिश्रा, मुंबई

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