श्रीकिशोर शाही
(अय्याश प्रिंस-२)
ब्रुनेई के खजाने से १५ बिलियन डॉलर का गायब होना सिर्फ एक दिन का खेल नहीं था। इसकी नींव कई साल पहले पड़ चुकी थी। १९८० के दशक में ब्रुनेई तेल और गैस के निर्यात से हर दिन करोड़ों डॉलर कमा रहा था। सुल्तान हसनल बोल्वैâया उस समय दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन चुके थे। उनके पास १,७८८ कमरों का महल था, जिसमें सोने के गुंबद थे। इस अथाह दौलत के बीच उनके सबसे छोटे भाई प्रिंस जेप्रâी का जन्म और पालन-पोषण हुआ था। जेप्रâी को जन्म से ही दुनिया की हर ऐशो-आराम की चीज बिना मांगे मिल गई थी।
सुल्तान अपने छोटे भाई को बेइंतहा प्यार करते थे। इसी अंधे प्यार और भरोसे के चलते उन्होंने १९८६ में जेप्रâी को ब्रुनेई का वित्त मंत्री बना दिया। इसके साथ ही ब्रुनेई इन्वेस्टमेंट एजेंसी के चेयरमैन की कुर्सी भी जेप्रâी को सौंप दी गई। यह एक ऐसी एजेंसी थी, जो ब्रुनेई की बेशुमार दौलत को विदेशी बाजारों में निवेश करती थी। लेकिन सुल्तान से यही सबसे बड़ी चूक हो गई। उन्होंने तिजोरी की चाबी एक ऐसे इंसान को सौंप दी थी, जिसकी रगों में खून नहीं, बल्कि अय्याशी का नशा दौड़ता था।
पद संभालते ही जेप्रâी ने देश के खजाने को अपनी निजी जागीर समझ लिया। उसके लिए सरकारी पैसा और अपना पैसा, दोनों में कोई फर्क नहीं रह गया था। वह हर दिन औसतन ५ लाख डॉलर (यानी करीब ४ करोड़ रुपए) सिर्फ अपने फालतू के शौक और अय्याशी पर खर्च करने लगा। उसका मानना था कि वह एक ऐसे देश का राजकुमार है, जिसका खजाना कभी खाली नहीं हो सकता।
जेप्रâी की लाइफस्टाइल किसी हॉलीवुड फिल्म के विलेन से भी ज्यादा चकाचौंध भरी थी। उसने लंदन और पेरिस के सबसे महंगे होटल्स को रातों-रात खरीद लिया। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। जल्द ही जेप्रâी का यह पागलपन एक ऐसी हद पार करने वाला था, जिसकी कल्पना ब्रुनेई जैसे एक सख्त इस्लामिक देश में किसी ने नहीं की होगी। कारों, हवेलियों और प्राइवेट जेट्स की उसकी भूख बढ़ती जा रही थी और इसके पीछे उनके दिमाग में चल रहा था एक और डार्क प्लान। एक ऐसा साम्राज्य बनाना जहां सिर्फ और सिर्फ उसकी हवस और उनका नियम चलता हो।
(शेष अगले
अंक में)
