गीता कपूर वर्तमान में ‘इंडियाज बेस्ट डांसर-सीजन ५’ की चार जजों में से एक हैं। इस शो में उनके साथ फिल्म अभिनेत्री करिश्मा कपूर, अभिनेता-निर्माता जावेद जाफरी और कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस भी जज की भूमिका निभा रहे हैं। गीता कपूर ने अपने करियर की शुरुआत मशहूर कोरियोग्राफर फराह खान की सहायक के रूप में की थी। आज वह एक वरिष्ठ कोरियोग्राफर हैं और अपने हंसमुख व्यक्तित्व के लिए जानी जाती हैं। उन्हें प्यार से ‘गीता मां’ भी कहा जाता है। पिछले २५ वर्षों से गीता कपूर ने अपना जीवन नृत्य को समर्पित कर रखा है। अविवाहित गीता ने अपनी मां की पूरे समर्पण के साथ सेवा की। वर्ष २०२१ में उनकी मां का अचानक निधन हो गया, जिससे उनके जीवन में एक गहरा खालीपन आ गया। गीता की पूरी दुनिया नृत्य के इर्द-गिर्द ही घूमती है। पेश हैं, गीता कपूर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
गीता, आपने ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ सीजन ५ के जज के रूप में अपना रोल स्वीकार किया… इस साल क्या खास बात है?
पिछले कई वर्षों में बॉलीवुड का फिल्मी नृत्य पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुआ है। भारत में नृत्य प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। शास्त्रीय, फिल्मी, हिप-हॉप या अन्य किसी भी शैली में युवा कलाकार अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘इंडियाज बेस्ट डांसर – सीजन ५’ प्रतियोगियों को अपने फिल्मी अंदाज का बेहतरीन प्रदर्शन करने का मंच देता है। शो में इसे ‘इंडियावाला डांस’ कहा जाता है, क्योंकि भारतीय नृत्य अपनी अनूठी शैली और यादगार ‘हुक स्टेप्स’ के लिए प्रसिद्ध है। इस सीजन का उद्देश्य तकनीकी उत्कृष्टता के साथ फिल्मी अंदाज और मनोरंजन का आकर्षण भी वापस लाना है।
क्या अब तक प्रस्तुत किए गए फिल्मी नृत्य आपकी उम्मीदों पर खरे उतरे हैं?
हां, बिल्कुल। हम चाहते हैं कि प्रतियोगी केवल किसी की नकल न करें, बल्कि अपनी प्रस्तुति में अपना तड़का भी लगाएं और अपनी अलग पहचान बनाएं। इस बार भी सभी प्रतियोगी बेहद प्रतिभाशाली और मजबूत हैं। वे अपना सर्वश्रेष्ठ देने के साथ अपनी कला का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रस्तुतियों में नवीनता और रचनात्मकता साफ दिखाई देती है। हमारा मानना है कि उन्हें रीमिक्स का अत्यधिक इस्तेमाल करने के बजाय पुराने गीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना चाहिए। इससे नई पीढ़ी तक सदाबहार गीत पहुंचते हैं और दर्शकों को बेहतरीन फिल्मी नृत्य का आनंद भी मिलता है।
सरोज खान प्रतियोगियों से बेबाकी से बात करती थीं। आप प्रतियोगियों की प्रशंसा और उनकी गलतियों की ओर कैसे ध्यान दिलाती हैं?
सरोज खान का प्रतियोगियों से सीधे बात करने का उद्देश्य उनकी कमियां बताकर उन्हें बेहतर बनाना था, न कि उन्हें आहत करना। मेरी भी यही सोच है कि जज का काम कलाकार का मनोबल बढ़ाना है। मैं अच्छे प्रदर्शन की खुलकर प्रशंसा करती हूं, क्योंकि सकारात्मक शब्द आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। वहीं, गलतियों की ओर इशारा करते समय शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि कठोर बातें मन पर गहरा असर छोड़ सकती हैं। मेरी कोशिश रहती है कि प्रतियोगी आलोचना से निराश होने के बजाय उससे सीखें, खुद को बेहतर बनाएं और जीतने की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें।
करिश्मा कपूर, जावेद जाफरी और टेरेंस लुईस के साथ आपकी जजिंग की केमिस्ट्री कैसी है? क्या किसी मुद्दे पर मतभेद भी होते हैं?
करिश्मा कपूर के साथ मेरी बहुत अच्छी समझ है। वह प्रतिभाशाली होने के साथ-साथ बेहद सहज और सकारात्मक इंसान हैं। टेरेंस लुईस और मेरे बीच हमेशा पेशेवर सम्मान रहा है। हमारे विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन बहस की नौबत कभी नहीं आती। इस बार जावेद जाफरी के साथ काम करना भी खास अनुभव है। ३५ साल पहले हमने साथ काम किया था और अब फिर एक मंच पर हैं। मेरा मानना है कि जैसे प्रतियोगियों को पूरी तैयारी के साथ आना चाहिए, वैसे ही जजों को भी नए डांस ट्रेंड्स और तकनीकों की पूरी जानकारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
आपकी निजी जिंदगी कैसी चल रही है?
लगातार डांस रियलिटी शोज में काम करने के कारण मुझे सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिली। लगभग सभी प्रमुख चैनलों पर मुझे काम करने का अवसर मिला है। पिछले कई वर्षों से मैं जज के रूप में काम कर रही हूं। दर्शकों ने हमेशा मुझे भरपूर प्यार और सम्मान दिया है।
कोरियोग्राफर के रूप में आपका करियर कैसे विकसित हुआ?
मेरा सफर काफी लंबा रहा। मैंने कभी यह तय नहीं किया था कि मैं इस क्षेत्र में आऊंगी। शुरुआत में मैं सिर्फ शौक के लिए नृत्य करती थी, लेकिन किस्मत और मेहनत ने मुझे कोरियोग्राफर बना दिया। लंबे समय तक डांस डायरेक्शन करने के बाद अचानक मुझे रियलिटी शो में जज बनने का अवसर मिला। मेरे निष्पक्ष काम को पसंद किया गया और फिर लगातार मौके मिलते गए। डांस और कोरियोग्राफी ही मेरी आजीविका का आधार बने। इसी दौरान मैं अपनी मां के साथ भी समय बिता सकी। मैंने फराह खान से बहुत कुछ सीखा। मेरा मानना है कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।
सभी आपको ‘गीता मां’ कहकर बुलाते हैं। क्या इससे आपको कोई परेशानी होती है? क्या इससे वरिष्ठता का एहसास होता है?
नहीं, मुझे इससे बिल्कुल भी परेशानी नहीं होती। शायद मेरे छात्रों ने मुझमें एक मां का स्नेह, प्यार और अनुशासन देखा, इसलिए उन्होंने मुझे ‘गीता मां’ कहना शुरू किया। पिछले १६ वर्षों से मैं अपने छात्रों और प्रतियोगियों के लिए ‘गीता मां’ हूं। यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उनके स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। मुझे इस संबोधन पर गर्व है।
पिछले २५-३० वर्षों में फिल्म उद्योग में नृत्य के रुझानों में कितना बदलाव आया है?
समय के साथ नृत्य के रुझानों में बदलाव आना स्वाभाविक है। बदलाव और निरंतरता, दोनों जरूरी हैं। जिस तरह समाज बदलता है, उसी तरह फिल्म उद्योग भी बदलता है। लेकिन मेरा मानना है कि आधुनिकता अपनाते हुए भी हमें अपनी मूल पहचान नहीं खोनी चाहिए। नृत्य में कलात्मकता, सुंदरता और शालीनता हमेशा बनी रहनी चाहिए। यही भारतीय फिल्मी नृत्य की असली पहचान है।
बॉलीवुड का सर्वश्रेष्ठ डांसर कौन है?
यह बहुत कठिन सवाल है। माधुरी दीक्षित और गोविंदा जैसे कई कलाकार बेहतरीन नर्तक हैं। लेकिन मेरी नजर में वह कलाकार भी उतना ही बड़ा डांसर है, जो नृत्य नहीं जानता, फिर भी पूरे मन से सीखने और अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करता है। अगर आपको नृत्य से प्यार है, तो आप नृत्य कर सकते हैं। सिर्फ इसलिए नाचना मत छोड़िए कि आप सभी स्टेप्स नहीं कर पाते। जहां तक मेरे पसंदीदा फिल्मी नर्तकों की बात है, तो शम्मी कपूर, शशि कपूर, ऋषि कपूर, रणबीर कपूर, वहीदा रहमान, वैजयंतीमाला, हेमा मालिनी, हेलेन और आशा पारेख का नृत्य हमेशा आंखों को सुकून देता है।
