रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
श्रावण मास शुरू होते ही मुंबई सहित देश विदेश के सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगती है। इसी तरह का नजारा मुंबई के प्रसिद्ध शिव मंदिर बाबुलनाथ मन्दिर में देखने को मिला, जहां हजारों शिव भक्त हर हर महादेव का जय घोष करते भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए पहली रात से ही प्रतीक्षा में खड़े हो गए थे। बाबुलनाथ मन्दिर के प्रबंधक मुकेश कनोजिया ने बताया कि 400 साल पुराना यह मंदिर स्वयंभू शिव का मंदिर है। इसका नाम बाबुलनाथ क्यों पड़ा के जवाब में कनोजिया बताते हैं कि दक्षिण मुंबई के एक स्वर्णकार की गायों को बाबुल नामक एक चरवाहा चराया करता था। शाम को सभी गाय का दूध तो मिल जाता लेकिन कपिला नामक गाय को जब दूहने का प्रयास किया जाता तो वह टांग उठा देती।जब मालिक ने बाबुल से पूछा कि क्या बात है तब उसने बताया कि जैसे ही दोपहर होता है वह अन्य गायों के समूह को छोड़कर अन्यत्र कहीं चली जाती है। उसका पीछा करने पर पता चला कि यह गाय जिस जगह पर खड़ी होती है उसके स्तन से दूध अपने आप एक जगह जमीन पर गिरने लगता है। खुदाई करने पर वहां एक स्वयंभू शिवलिंग मिला जो बाबुलनाथ के नाम से मशहूर है। शिव भक्तों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इस वर्ष बाबुलनाथ के इस शिव मन्दिर में 30 जुलाई से 11 सितंबर तक श्रावण महोत्सव मनाया जा रहा है। जहां भगवान शिव का प्रतिदिन अलग अलग ढंग से उनका श्रृंगार किया जाएगा। श्रृंगार के समय सिर्फ दर्शन करने तथा फूल चढ़ाने की अनुमति है। भक्तों को बरसात से बचने के लिए लिफ्ट के बाहर एक शेड बनाया गया है। मंदिर में भक्तों की सुरक्षा के लिए सी सी टीवी तथा भारी पुलिस बल तैनात किए गए हैं। बाबुलनाथ के इस मंदिर में भक्त सुबह 5 बजे से लेकर रात साढ़े 11 बजे तक दर्शन का लाभ ले सकते हैं।
