मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिपुस्तक समीक्षा : पंडित मुस्तफा आरिफ कृत गीता भारती भगवद गीता हिंदी मुक्तक...

पुस्तक समीक्षा : पंडित मुस्तफा आरिफ कृत गीता भारती भगवद गीता हिंदी मुक्तक में

 राजेश विक्रांत

आओ सत्यमेव जयते कहें और करें सदकर्म। सार्थक हो जाए सृष्टि पर आना जनम जनम। यूं तो विश्व के सब धर्मग्रंथ ही है कर्म प्रधान, परंतु गीता का आगमन और उदगम सर्वप्रथम। परिश्रम करो कठोर, करो निष्काम कर्म। फल की चिंता न करो, कर्म है मानव धर्म। कर्म करो बस कर्म करो।
पंडित मुस्तफा आरिफ कृत गीता भारती भगवद गीता हिंदी मुक्तक में की शुरूआत भगवदगीता के पहले अध्याय की इन पंक्तियों से होती है और 18 वें अध्याय की निम्नलिखित पंक्तियों से समापन है-
जहां कृष्ण का मार्गदर्शन,
न मैं संजय न अर्जुन हूं और न कोई बुद्धिमान। मैं एक सूक्ष्म प्राणी जगत का, न ही मैं हूं महान। मैं पंडित मुस्तफा हूं, कृष्ण कृपा प्रेम में बंधा हुआ, रचा भगवद्गीता से प्रेरित, गीता भारती-अनुष्ठान। परिश्रम करो कठोर, करो निष्काम कर्म…
श्रीमद्भगवद्‌गीता दुनिया के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को सुनाया था। इसी संदेश से उपजा यह ग्रंथ द्वापर युग से आज तक अनेक संत-महात्माओं का मार्गदर्शन करता रहा है। अनेक साधारण लोग इसकी शिक्षाओं पर चलकर महान् बने हैं। मीरा, सूर, चैतन्य से लेकर महात्मा गांधी तक भगवद्गीता से जीवन-शक्ति ग्रहण करते रहे हैं। महात्मा गांधी के शब्दों में- “जब मुझे संदेह आ घेरते हैं; निराशाएँ चेहरे को बेनूर कर देती हैं। और आशा की कोई किरण नजर नहीं आती तो मैं ‘गीता’ में इसका हल तलाशता हूं और फौरन ही मेरे चेहरे पर मुसकान खेलने लगती है, गम के बादल छँट जाते हैं। जो लोग प्रतिदिन गीता पाठ पढ़ते हैं, वे आनंद से हमेशा ताजादम रहते हैं और उन्हें इसके रोज नए-नए अर्थ मालूम होते हैं। ”
मुंबई निवासी पंडित मुस्तफा आरिफ कृत गीता भारती में 700 श्लोकों वाली भगवदगीता को 786 सरल मुक्तकों में प्रस्तुत किया गया है। ताकि आम आदमी भी गीता का सार आसानी से समझ सके। पुस्तक की भूमिका यानी गीता भारती अनुष्ठान ने आरिफ जी ने लिखा है कि-
गुणों के बंधन से मुक्त हो, सांसारिक डोर तू छोड़।
निद्वंद्व से होकर मुक्त तू, सत्वगुणो से नाता जोड़। सुख-दुख लाभ-हानि से मुक्त, आत्मा को पहचान। महान बनते हैं ऐसे लोग, इस सत्य को तू न छोड़।
भगवत गीता के 700 संस्कृत श्लोकों का काव्यांश रूपांतरण वह भी सम सरल हिंदी मुक्तक में करना एक कठिन काम था और इस कठिन काम को संभव कर दिखाया पंडित आदित्य मुस्तफा ने इसीलिए पुस्तक की संपादक प्रिया उपाध्याय ने गीता भारती को आध्यात्मिक यात्रा का नया अध्याय कहा है। डॉ. शोभना तिवारी ने पंडित मुस्तफा आरिफ को सद्भाव के आध्यात्मिक संवाहक की संज्ञा दी है। लेखक पवन सेठी के अनुसार, गीता भारती ने कृष्ण वाणी को भाषा, संस्कृति व समय के स्वर दिए हैं। मुरलीधर चांदनीवाला की राय में यह कृति दो धर्मों को आपस में मिलाने का कालजयी उद्योग है। मौलाना मोहम्मद बुरहानुद्दीन कासमी के शब्दों में गीता भारती पवित्र छंदों के माध्यम से आत्माओं का सेतु है। जबकि लेखक व समीक्षक आशीष दशोत्तर ने भगवदगीता को जीवन की चुनौतियों का मुकाबला करने का शाश्वत मार्ग कहा है।
कृतिकार मुस्तफा आरिफ के अनुसार संपूर्ण भगवदगीता का मूल कर्म ही है। भगवान श्री कृष्ण ने परमात्मा के साकार रूप में प्रकट होकर महाभारत के महान योद्धा के माध्यम से अखिल ब्रह्मांड को यही उपदेश दिया है,
कर्म को विशुद्ध कर्म के स्वरूप में धारण कर परमात्मा के उपदेशों का पालन कर स्वधर्म का मार्ग ही आत्म कल्याण का मार्ग है। गीता के समस्त 18 अध्यायों में श्री कृष्ण ने अर्जुन को इस बात के लिए प्रशिक्षित किया कि युद्ध भी कर्म है। उसकी राह में पवित्रता और लक्ष्य प्रमुख तत्व है। लक्ष्य जब हो तो सिर्फ चिड़िया की आंखें होती हैं और जब परमात्मा साथ हो, आपका मार्ग स्वधर्म में हो तब संपूर्ण विजय निश्चित है।
पंडित मुस्तफा आरिफ ने गीता भारती को गुरु सांदीपनि को श्रद्धा पूर्वक समर्पित किया है। कुरान शरीफ की आयतों पर आधारित ग्रंथ एक है तू एक है के 10,000 पद हिंदी में लिख चुके हैं। वे अपने को आध्यात्मिक रचनाकार मानते हैं। जिसकी रचनाधर्मिता का आधार विभिन्न धर्म ग्रन्थों में समय की खोज है। कर्म ही इसका मूल है और कर्म की स्थापना में ही सिर्फ मानव मात्र का ही नहीं संपूर्ण सृष्टि का कल्याण निहित है। गीता भारती भी इसी बात का प्रचार प्रसार करती है और दुनिया भर को आध्यात्मिक श्रेष्ठता का, आध्यात्मिक पवित्रता का संदेश देती है। गीता भारती का प्रकाशन मार्ग मीडिया मुंबई ने किया है। इसकी पृष्ठ संख्या 236 है और मूल्य रुपए 599। श्रीमद्भागवत गीता को हिंदी मुक्तक के जरिए जानने समझने की इच्छा रखने वाले पाठकों के लिए यह कृति एक अमूल्य उपहार है।

अन्य समाचार