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अतीक का कुनबा मिटा :  5 में 4 खत्म…जनाजे के लिए जेल से आएंगे 2 बेटे

डॉ. मंगलेश्वर त्रिपाठी

एक समय था, जब प्रयागराज से लखनऊ तक अतीक अहमद के नाम से सियासत और सिस्टम दोनों कांपते थे। पांच बेटे, करोड़ों की प्रॉपर्टी और खौफ का साम्राज्य। 30 महीने में सब तहस-नहस। झांसी के पास सड़क हादसे में सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की मौत के बाद अब सिर्फ चौथे नंबर का बेटा अहजम ही बचा है।
इस बर्बादी की शुरुआत 24 फरवरी 2023 को हुई। उस दिन प्रयागराज में उमेश पाल और उनके दो गनरों की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। इसी केस ने अतीक परिवार की किस्मत लिख दी। 13 अप्रैल 2023 को झांसी में यूपी एसटीएफ की मुठभेड़ में तीसरा बेटा असद अहमद मारा गया। असद पर 5 लाख का इनाम था और वो उमेश पाल हत्याकांड का मुख्य शूटर बताया गया।
बेटे की मौत के 2 दिन बाद 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल के बाहर पुलिस कस्टडी में अतीक और भाई पूर्व विधायक अशरफ को मीडिया के सामने गोली मार दी गई। सवाल आज भी जिंदा हैं। एक हफ्ते में बाप-बेटा दोनों खत्म। इसके बाद कानून का शिकंजा ऐसा कसा कि परिवार के एक-एक मोहरे गिरते गए। बड़े बेटे मोहम्मद उमर अभी लखनऊ जेल में हैं और दूसरे नंबर के अली अहमद को नैनी से शिफ्ट कर झांसी जेल में रखा गया है। दोनों पर जमीन कब्जा, वसूली और उमेश पाल हत्याकांड समेत दर्जनों मुकदमे हैं। अतीक के साम्राज्य की बागडोर संभालने का आरोप भी इन्हीं पर है।
जनाजे के लिए मिली पैरोल
आबान के अंतिम संस्कार पर अब नया मोड़ आया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उमर और अली की पैरोल अर्जी मंजूर कर ली है। जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत ने शर्त रखी कि दोनों मीडिया से बात नहीं करेंगे। अर्जी अतीक की बहन परवीन कुरैशी की ओर से वकील सैयद सफदर अली काजमी और शादाब अली ने लगाई थी।
पैरोल के बाद पुलिस और जेल प्रशासन दोनों को कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज के कसारी-मसारी लाने की तैयारी में है। कागजी प्रक्रिया के चलते आबान का अंतिम संस्कार शनिवार को होगा। जनाजे के दौरान शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस और खुफिया एजेंसियां तैनात रहेंगी।
अगस्त 2026 में झांसी के पास हुए हादसे में आबान की मौत हुई। पुलिस इसे सामान्य दुर्घटना बता रही है, पर एनकाउंटर, हत्या और जेल की कहानियों वाले इस परिवार में हर मौत सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल शाइस्ता परवीन को लेकर है। पहले बेटा असद, फिर पति अतीक और देवर अशरफ और अब बेटा आबान चला गया। इसके बाद भी शाइस्ता सामने नहीं आई। वो उमेश पाल केस की मुख्य साजिशकर्ता है और मार्च 2023 से उस पर 50 हजार का इनाम है। पति-बेटों की मौत के बाद भी उसे अपनी सुरक्षा की फिक्र ज्यादा है। अतीक की हत्या के बाद से वो फरार है।
नाबालिग बेटा अहजम अहमद अभी रिश्तेदारों के संरक्षण में है।
तस्वीर साफ है। 5 बेटों में 2 जेल से पैरोल पर जनाजे में आएंगे, 1 एनकाउंटर में मारा गया, 1 हादसे में गया, मां फरार। बचा सिर्फ अहजम। अतीक के कुनबे का “खात्मा” यूपी में माफिया-राजनीति के गठजोड़ के अंत की इबारत है।
सरकार इसे “कानून का राज” कह रही है, आलोचक इसे त्वरित न्याय बता रहे हैं। प्रयागराज की गलियों में चर्चा है कि जिसे बनाने में दशक लगे, उसे मिटने में सिर्फ 30 महीने लगे।

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