भूपेंद्र सारस्वत ‘सारथी’
आखिरकार, अब जनता की आंखों पर पड़ा पर्दा धीरे-धीरे हट रहा है, लेकिन नेताजी की यह पुरानी आदत अभी भी गई नहीं थी। नेताजी जब भी जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी के दफ्तर जाते, तो एक खास पैंतरा अपनाते। काम हो या न हो, साहब के साथ एक मुस्कुराती हुई तस्वीर किसी भी तरह खिंचवा ही लेते। शाम होते-होते वह तस्वीर सोशल मीडिया पर तैरने लगती और अगले दिन स्थानीय अखबार के पन्नों पर छप जाती। साथ में भारी-भरकम संदेश लिखा होता। क्षेत्र की शांति और जनसमस्याओं के निवारण हेतु उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक। शहर के चौराहे पर स्थित चाय की दुकान पर नेताजी के दो-चार समर्थक इन्हीं तस्वीरों को दिखाकर आम जनता को रौब में लेने की कोशिश करते। देख रहे हो साहब सीधे नेताजी की सुनते हैं। शहर में किसकी हिम्मत जो हमारे रहते सिर उठा ले, लेकिन हकीकत यह थी कि इन्हीं नेताजी का असल काम शहर की आबोहवा में स्वयं का व्यापक प्रचार था। जब भी शहर में अमन-चैन का माहौल होता, तो नेताजी किसी न किसी राजनीतिक मंच पर खड़े होकर ऐसा भड़काऊ बयान दे आते, जिससे बरसों पुरानी भाईचारे की दीवार में दरार आ जाए। उनका समाज से जनता की असल तकलीफों या तरक्की से कोई लेना-देना नहीं था, उनका एकमात्र मकसद अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना और प्रसिद्धि फैलाकर अपना वजूद बचाए रखना था। एक दिन चौराहे की उसी चाय की दुकान पर नेताजी खुद पधारे, हाथ में वही अधिकारियों के साथ छपी नई फोटो की अखबार कटिंग थी। नेताजी ने बड़ी अदा में तानकर वहां बैठे कहा-देखा कैसे प्रशासन को अपने इशारों पर नचाता हूं? शहर की शांति और व्यवस्था हमारे ही दम पर टिकी है। सारथी ने चाय का घूंट लिया, मुस्कुराए और शांत आवाज में बोले, नेताजी आप तस्वीरों से अधिकारियों, निरीह जनता को भले गुमराह कर लें और दफ्तरों में बैठकर जनता को डराने का भ्रम पाल लें, लेकिन ये नई पब्लिक है, सब जानती है। अब सबको सब दिख रहा है कि कौन शहर में शांति ला रहा है? और कौन अपनी राजनीति चमकाने के लिए जहरीली हवा फैला रहा है? अब आपकी ये पुरानी तरकीबें चलने वाली नहीं हैं। नेताजी की मुस्कान पल भर में गायब हो गई। उनके पास कहने को कोई शब्द नहीं बचा था? उन्हें समझ आ गया था कि जनता अब उनके बहकावे में आने वाली नहीं है, क्योंकि उनके पीछे की असली नीयत को शहर भली-भांति पहचान चुका था। वर्तमान समय परिवर्तनीय है, नित्य नियम पर नियम, मंहगाई, बेरोजगारी, खुल्लमखुल्ला भ्रष्टाचार आदि भी काफी सहयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
बाकी सब माया से जग वकिफ ही है।
