हनीफ जवेरी
अब फिल्म निर्माण पूरी तरह एक व्यवसाय बन चुका है। इसलिए निर्माता फिल्म शुरू करने से पहले उसके हर पहलू पर गंभीरता से विचार करते हैं। फिल्म का बजट, कलाकारों का चयन, वितरण की योजना और रिलीज की तारीख तक पहले से तय कर ली जाती है। लेकिन पहले ऐसा नहीं था। उस दौर में यदि किसी फिल्म निर्माता की बड़ी फिल्म बुरी तरह असफल हो जाती और वितरकों से मिलने वाली ओवरफ्लो की रकम भी नहीं मिलती, तो अपनी प्रोडक्शन कंपनी को आर्थिक संकट से बचाने के लिए वह तुरंत कम बजट की एक नई फिल्म शुरू कर देता था। ऐसा ही एक वाकया बी.आर. चोपड़ा के साथ भी हुआ। अपने बेटे रवि चोपड़ा को निर्देशक के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने बड़े बजट की फिल्म `जमीर’ बनाई, जिसमें महानायक अमिताभ बच्चन और सायरा बानो मुख्य भूमिकाओं में थे। लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। नतीजतन, बी.आर. फिल्म्स की आर्थिक स्थिति डगमगा गई और कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में आ गई।
इस कठिन दौर से उबरने के लिए बी.आर.चोपड़ा ने अपने वित्तीय सहयोगियों और कुछ भरोसेमंद अधिकारियों के साथ बैठक की, ताकि कंपनी को इस संकट से बाहर निकालने का कोई रास्ता खोजा जा सके। लंबी बैठक के दौरान पता चला कि बी.आर.फिल्म्स के खाते में केवल ३५ से ४० लाख रुपए ही बचे हैं। इसलिए यह फैसला लिया गया कि कंपनी आर्थिक संकट से उबरने के लिए कम बजट की एक जल्दी बनने वाली फिल्म बनाएगी। इसके बाद निर्देशक बासु चटर्जी के साथ एक समझौता हुआ, जिसमें उन्हें स्लीपिंग पार्टनर बनाया गया। इसी तरह कम बजट में बनी फिल्म `छोटी सी बात’ तैयार हुई, जो सुपरहिट साबित हुई।
बी.आर.फिल्म्स की तरह ही देव आनंद की कंपनी नवकेतन भी उस समय आर्थिक संकट में आ गई, जब उनकी फिल्म `इश्क इश्क इश्क’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। जबकि इस मल्टीस्टारर फिल्म में जीनत अमान, शबाना आजमी और जरीना वहाब जैसी नामी अभिनेत्रियां थीं। फिल्म की असफलता ने नवकेतन की नींव तक हिला दी। फिर भी देव आनंद को पूरा विश्वास था कि वह अपनी कंपनी को दोबारा खड़ा कर सकते हैं। इसी सिलसिले में आनंद बंधुओं की एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें दो महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। पहला सुझाव चेतन आनंद ने दिया। उनका कहना था कि यदि नवकेतन सीमित बजट में एक जल्दी बनने वाली (क्विकी) फिल्म बनाएं, तो कंपनी की आर्थिक स्थिति को फिर से नियंत्रण में लाया जा सकता है। लेकिन इसके साथ उन्होंने एक शर्त भी रखी। यह फिल्म केवल हेमा मालिनी को लेकर ही बनाई जाए।
उन दिनों हेमा मालिनी की लोकप्रियता अपने चरम पर थी और देव आनंद के साथ उनकी फिल्म `अमीर गरीब’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल कर चुकी थी। चेतन आनंद ने साफ शब्दों में कहा था कि यदि हेमा इस फिल्म के लिए तैयार नहीं होतीं, तो नवकेतन के कार्यालय पर ताला लगाकर पूरे स्टाफ का हिसाब-किताब चुकता करना पड़ेगा। देव आनंद विशेष विमान से श्रीनगर पहुंचे, जहां हेमा मालिनी अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। वहां उनकी मां जया चक्रवर्ती भी मौजूद थीं। उन्होंने देव आनंद से साफ कहा कि हेमा फिल्म तो साइन कर लेंगी, लेकिन शूटिंग के लिए तारीखें देना मुश्किल होगा, क्योंकि उन दिनों उनकी कई फिल्में एक साथ फ्लोर पर थीं। लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी एक `ना’ नवकेतन पर ताला लगने की वजह बन सकती है, तो उन्होंने तुरंत देव आनंद का सहयोग करने का फैसला किया। इसके बाद हेमा और देव अभिनीत फिल्म `जानेमन’ कम समय में बनकर रिलीज हुई। फिल्म सफल रही और उसकी कामयाबी की बदौलत नवकेतन आर्थिक संकट से उबर गया तथा कंपनी बंद होने से बच गई।
