सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल पुराने ही मुद्दों को नए लिबास में पेश किया। ‘नशामुक्त भारत’, ‘विकसित भारत’ और ‘महिला आरक्षण’ जैसी पहले की गई घोषणाओं को दोहराते हुए मोदी ने एक बार फिर नक्सलवाद के खिलाफ अपना रुख दोहराया।
उन्होंने कहा कि देश सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है, लेकिन ‘दिमागी नक्सलवाद’ का खतरा अभी भी कायम है। इससे सावधान रहने का आह्वान उन्होंने किया। मोदी के इस भाषण पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आर्इं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी ने युवाओं, शिक्षित लोगों और कॉकरोचों तक को ‘दिमागी नक्सली’ करार दिया है।
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों पर हमले को लेकर विपक्ष द्वारा संसद में सरकार को घेरने के बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर बात की। केंद्र सरकार के कामकाज का ब्योरा पेश करते हुए मोदी ने नक्सलवाद के खात्मे का मुद्दा उठाया। मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सशस्त्र हिंसा को रोकने तक सीमित नहीं है। युवाओं को नशे और हिंसा से दूर रखकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। नशामुक्त भारत के लिए देश के सभी वर्गों को साथ आने का आह्वान भी उन्होंने किया।
राहुल गांधी की अनुपस्थिति
विपक्ष के नेता राहुल गांधी लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थित रहे। उन्होंने ‘सोशल मीडिया’ पर पोस्ट कर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। राहुल गांधी ने लोकतंत्र, संविधान और तिरंगे की रक्षा के लिए सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
पेपर लीक पर बोलने से बचते रहे मोदी
मोदी ने अपने भाषण में डिजिटल इंडिया, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, एआई, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग जैसे नई पीढ़ी से जुड़े विषयों पर बात की। लेकिन युवाओं को परेशान करने वाले और कई छात्रों की आत्महत्याओं का कारण बने केंद्रीय परीक्षाओं में घोटालों के मुद्दे पर बोलने से उन्होंने परहेज किया।
