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यह सरकार फेल…राज्य में ३५ हजार ३०० उद्योग बंद!.. आदित्य ठाकरे का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार के कार्यकाल में राज्य में कुल ३५ हजार ३०० उद्योग-धंधे बंद हो गए हैं। चाकण जैसे औद्योगिक क्षेत्र में तो उद्योग चलाना भी मुश्किल कर दिया गया है। यही वजह है कि यहां के २० से ज्यादा उद्योग महाराष्ट्र छोड़ने की स्थिति में हैं। यह पूरी तरह सरकार की विफलता है, ऐसा जोरदार हमला शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने कल पुणे में सरकार पर किया।
आदित्य ठाकरे ने पुणे के चाकण क्षेत्र की सड़कों का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि एमआईडीसी क्षेत्र में कचरे का साम्राज्य पैâला हुआ है, जबकि बिजली आपूर्ति की समस्या भी गंभीर है। नासिक में भी यही स्थिति है और प्रशासन के बीच समन्वय का अभाव है। इस दौरान आदित्य ठाकरे ने एमआईडीसी, वासोली फाटा, हुंडई चौक, खालुंब्रे रोड, कोरेगांव फाटा, आंबेठाण गांव, वाघजाईनगर और खराबवाड़ी की सड़कों का निरीक्षण कर उनकी बदहाल स्थिति को उजागर किया।
उद्योग मंत्री के साथ घूमनेवाले लोग ‘टोलनाके’!
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि महालुंगे कमान स्थित ब्रिटिशकालीन पुल की आवश्यक मरम्मत भी नहीं की गई है। पुणे के चाकण क्षेत्र की सड़कों के निरीक्षण के दौरान विधायक बाबाजी काले, जिलाप्रमुख रामदास धनवटे, जिला परिषद के गटनेता विजय शिंदे पाटील, विनया मुंगसे, तनुजा घनवट, पंचायत समिति सभापति विद्या मोहिते आदि उपस्थित थे। उद्योग मंत्री के यहां आयोजित दौरे को लेकर आदित्य ठाकरे ने उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि रविवार है इसलिए उन्हें यहां नहीं आना चाहिए। यदि नागरिकों की समस्याएं जाननी हैं तो प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था को किनारे रखकर आम नागरिकों की तरह यहां आएं। कल उद्योग मंत्री आएंगे और बड़ी-बड़ी घोषणाएं करेंगे, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने उद्योग मंत्री के आसपास घूमने वाले लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग ‘टोलनाके’ के रूप में काम कर रहे हैं।
मुंढे जैसे कड़क अधिकारी की जरूरत
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि एमआईडीसी और पीएमआरडीए में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है। हर काम का एक निर्धारित रेट तय है। उन्होंने कहा कि चाकण एमआईडीसी क्षेत्र की समस्याओं को हल करने के लिए तुकाराम मुंढे जैसे कड़क और ईमानदार अधिकारी की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में देश में १२० करोड़ नौकरियों की आवश्यकता होगी, जबकि अनुमान है कि केवल ४० करोड़ नौकरियां ही उपलब्ध होंगी। ऐसी स्थिति में यदि उद्योग ही महाराष्ट्र से बाहर जा रहे हैं तो बाकी ८० करोड़ लोग रोजगार के लिए कहां जाएंगे?

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