संवाददाता / मुंबई
सनातन धर्म में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानव समाज के बीच गहरे संबंध का संदेश भी देते हैं। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नागपंचमी का पर्व इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। इस दिन नाग देव की पूजा-अर्चना कर उनसे परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व -पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नागों को भगवान शिव का आभूषण और भगवान विष्णु की शैया (शेषनाग) के रूप में पूजा जाता है। महाभारत की कथा के अनुसार, जब राजा परीक्षित के पुत्र जन्मजय ने सर्पसत्र यज्ञ का आयोजन किया था, तब आस्तिक मुनि ने श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन ही नागों की रक्षा की थी। तभी से इस तिथि को नागपंचमी के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन व्रत रखने और नाग देव को दूध, अक्षत व फूल अर्पित करने से सर्पभय से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष का प्रभाव भी कम होता है।
प्रकृति और पर्यावरण से गहरा संबंध
धार्मिक दृष्टिकोण से परे, नागपंचमी का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व भी अतुलनीय है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और सांपों को ‘किसान का मित्र’ माना गया है।
फसल की सुरक्षा: सांप खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और अन्य कीटों का शिकार करके उन्हें नियंत्रित रखते हैं।
पारिस्थितिकी संतुलन: नाग खाद्य श्रृंखला (Food Chain) का एक प्रमुख हिस्सा हैं। यदि सांप न रहें, तो चूहों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि से अकाल जैसी स्थिति बन सकती है। वर्षा ऋतु में जब सांपों के बिल पानी से भर जाते हैं, तो वे बाहर निकल आते हैं। नागपंचमी का त्योहार हमें यह सीख देता है कि हम इन जीवों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उनके अस्तित्व का सम्मान करें और उनका संरक्षण करें।
बदलते दौर में पूजा का स्वरूप
प्राचीन समय में इस दिन नागों को नुकसान न पहुंचाने का संकल्प लिया जाता था। हालांकि, आधुनिक समय में पूजा के नाम पर जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाना या उन्हें यातना देना पूरी तरह अनुचित है। हमें जीवित सांपों को जंगलों में सुरक्षित रहने देना चाहिए और मिट्टी या चित्र के नाग देव बनाकर ही उनका पूजन करना चाहिए।
निष्कर्ष
नागपंचमी का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि हर छोटे-बड़े जीव का इस सृष्टि के संतुलन में योगदान है। आइए, इस नागपंचमी पर हम न केवल नाग देव की पूजा करें, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण का भी संकल्प लें।
