किसी ने पूछा,
सबसे विश्वसनीय और
सुरक्षित क्या है?
बालक ने कहा, मेरी मां की गोद,
भाई ने कहा, मेरी बहन का कलाई में बांधा
राखी का धागा!
पति ने कहा, मेरे दुर्दिनों में मेरी पत्नी के बाहों का घेरा!
एक वृद्ध पति ने कहा, मेरे कांपते हाथों पर मेरे पत्नी के हाथ।
वही अबला कहलाने वाली नारी
शक्ति और विश्वास का पुंज बनी है।
सबला ही नहीं अब रक्षक और पालक भी बनी है।
चित से कोमल कभी चट्टान सी कठोर
बन जाती जब दिखानी हो क्षमता।
बैठ अश्व पर रण में उतरती
बांध पीठ पर बालक अपना
एक हाथ खड्क दूसरे में भाला
शत्रु दल को जलाती बन कर ज्वाला।
वहीं वैध्वय झेलती, निर्धनता से लड़ती
एक मां ने अपने बच्चों को पाला।
घिरते जब दुखों के बादल
सबने कातर हो मां जननी को पुकारा।
मां का साया, सुखों की छाया
कुमाता होना मां को न भाया
हर घड़ी मां ने दिये आशीर्वाद
बच्चों पर ममता का सागर बरसाया।
प्रकृति ने नारी को जग सृजन में
सबसे सुरक्षित विश्वस्त पाया।
-बेला विरदी
