मुख्यपृष्ठविश्वमुस्लिम वर्ल्ड : न्यूयॉर्क जाकर बुरे फंसे ईरानी विदेश मंत्री!

मुस्लिम वर्ल्ड : न्यूयॉर्क जाकर बुरे फंसे ईरानी विदेश मंत्री!

-सूफी खान
न्यूयॉर्क में ट्रंप के दो रिप्रजेंटेटिव्स स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से अकेले में बात करना ईरान के फॉरेन मिनिस्टर सैय्यद अब्बास अरागची को भारी पड़ गया है। जी हां, ईरान की संसद उनके खिलाफ सख्त हो गई है और उन्हें ओहदे से हटाने की तैयारी है। ईरान की पार्लियामेंट में अब्बास अरागची के खिलाफ महाभियोग को रजिस्टर किया जा चुका है। सैय्यद अब्बास अरागची पर इल्जाम है कि अमेरिका पहुंचकर उन्होंने दुश्मन के नुमाइंदों के साथ ऐसी बातें कीं, जिनके लिए ईरान के सुप्रीम लीडर की इजाजत थी ही नहीं। यही वजह है कि ६ अक्टूबर को ईरान की तरफ से बताया गया है कि फॉरेन मिनिस्टर के खिलाफ पार्लियामेंट में इस संबंध में आए एक प्रस्ताव पर सहमति बन गई है और अब सैय्यद अब्बास अरागची के खिलाफ महाभियोग चलाया जाएगा।
हालांकि, अभी इस पूरी कार्रवाई को ईरान की पार्लियामेंट के प्रोसेस से गुजरना होगा। सितंबर में जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची प्रेसिडेंट मसूद पजेश्कियान के साथ यूनाइटेड नेशन्स की जनरल असेंबली की मीटिंग में शिरकत करने न्यूयॉर्क गए थे। उन्होंने ट्रंप के दो नुमाइंदों-एक मिडिल ईस्ट के लिए स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और दूसरे ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर-से बात की थी। अब ईरान में उन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर से बिना पूछे शांति के लिए रोडमैप पेश कर दिया। इस प्रपोजल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की बात भी शामिल थी। लेकिन ट्रंप ने उनके इस प्रपोजल को रिजेक्ट भी कर दिया था। इससे ईरान में और गुस्सा है। एक तो सैय्यद अब्बास अरागची बिना पूछे दुश्मन से बात कर रहे थे और उस पर दुश्मन ने ईरान को और बेइज्जत किया। अब ईरानी पार्लियामेंट में अरागची को इस बात का जवाब देना पड़ेगा कि उन्होंने अमेरिका के साथ क्या-क्या बात की थी और किस अथॉरिटी के तहत की थी।
सैय्यद अब्बास अरागची टॉप ईरानियन डिप्लोमेट तो हैं ही, साथ ही साथ ईरान में १९७९ के इस्लामिक रेवोल्यूशन से भी जुड़े हुए हैं। अपनी जवानी में ही उन्होंने ईरान की पासदाराने इस्लाम यानी आईआरजीसी ज्वाइन कर ली थी। इस दौरान १९८० से ८८ तक चले ईरान-इराक युद्ध में उन्होंने आईआरजीसी में अहम रोल प्ले किया। १९८९ में अब्बास अरागची ईरान फॉरेन मिनिस्ट्री में दाखिल हुए और कई मुल्कों में ईरान के एंबेसेडर बने। साल २०१३ आते-आते वो ईरानी विराजते खारिजा यानी विदेश मंत्रालय के तर्जुमान बन चुके थे। उन्होंने ब्रिटेन से पॉलिटिकल थॉट्स में डॉक्टरेट भी किया है।
१९६२ में ईरान की मजहबी कारोबारी फैमिली में पैदा हुए अरागची अपने मुल्क को मौजूदा हालात से कितनी कामयाबी से निकाल पाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। या फिर सजा के हकदार बनते हैं? यह भी वक्त बताएगा।

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