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मनपा की लापरवाही-ठेकेदारों की मौज, घाटकोपर सीवेज प्लांट में देरी!

-करोड़ों का बजट ठिकाने, फिर भी तारीख-पर-तारीख
द्रुप्ति झा / मुंबई
मनपा के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गई है। घाटकोपर- पूर्व में निर्माणाधीन मल जल प्रक्रिया केंद्र का काम अपनी तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी कछुआ गति से चल रहा है। मनपा के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने इस परियोजना स्थल का दौरा कर काम का जायजा लिया। इस दौरान प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार और तकनीकी खामियों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
३३७ एमएलडी (दस लाख लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर तकनीक आधारित परियोजना को बहुत पहले पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन नगरपालिका की लापरवाही के कारण सेकेंडरी ट्रीटमेंट के लिए आवश्यक पाइपलाइन (लिक्विड पाइपलाइन) का काम ३१ दिसंबर तक खिसका दिया गया है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ३१ मार्च की नई तारीख दी गई है। बार-बार तारीखें बदलने से यह स्पष्ट है कि बीएमसी का ठेकेदारों पर कोई नियंत्रण नहीं है और जनता की गाढ़ी कमाई को प्रोजेक्ट की बढ़ती लागत में झोंका जा रहा है।
घाटकोपर से मानखुर्द तक जनता परेशान
घाटकोपर, मानखुर्द, गोवंडी और चेंबूर क्षेत्र के लाखों नागरिक सालों से गंदे पानी और प्रदूषण से बेहाल हैं। बीएमसी का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से समुद्री पर्यावरण और जनस्वास्थ्य में सुधार होगा, लेकिन काम की वर्तमान रफ्तार को देखते हुए नागरिकों को राहत मिलना फिलहाल मुमकिन नहीं दिखता। दौरे के दौरान अतिरिक्त आयुक्त बांगर ने पंप हाउस, स्लज प्रोसेसिंग यूनिट, इनलेट-आउटलेट सिस्टम, पंपिंग उपकरण, एअर ब्लोअर्स, ट्रांसफॉर्मर, कंट्रोल एवं ऑटोमेशन और बैकअप पावर मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। हालांकि, हर बार की तरह सिर्फ दिशा-निर्देश और काम में तेजी लाने के मौखिक आदेश देकर खानापूर्ति कर दी गई। परियोजना स्थल पर १,००० से अधिक मजदूर तैनात होने के बावजूद काम की गुणवत्ता, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और क्रियान्वयन में भारी चूक सामने आ रही है।

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