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गजब का भ्रष्टाचार, कैसे बचेगी बेस्ट?

-५० करोड़ खर्च, १२ साल में १२ करोड़ रुपए कमाई
-भारी भ्रष्टाचार, ‘चलो’ ऐप मामले में जांच की उठी मांग
फडणवीस के करीबी आईएएस ने `चलो’ ऐप चुना
रामदिनेश यादव / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली बेस्ट परिवहन सेवा घाटे में ही जा रही है। बेस्ट को यह सेवा संचालित करने के लिए कभी मनपा के आगे हाथ पैâलाना पड़ रहा है तो कभी सरकार आगे, इसे घाटे का सौदा बताकर सरकार कभी इसकी जमीनें बेच रही है तो कभी बिजली आपूर्ति सेवा निजी कंपनियों के हाथों में सौप रही है, लेकिन सवाल यह है कि यह बेस्ट बचेगी वैâसे? जब सरकार और इसके अधिकारी ही मिलकर उसको लूट रहे हैं। बेस्ट को लूटने का एक ताजा मामला बेस्ट की समिति में उठा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सबसे करीबी आईएएस अधिकारी लोकेशचंद्र ने२०२२ में बेस्ट को आधुनिक बनाने के नाम पर अपने करीबी रिश्तेदार की कंपनी चलो मोबाइलीटी अर्थात ‘चलो ऐप’ के साथ ऐसा करार किया है कि सीधे ४० करोड़ का नुकसान हुआ है। इस करार को ऐतिहासिक बताते हुए बेस्ट कमिटी के सदस्यों ने आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग की है।
शिवसेना सदस्य नितिन नांदगांवकर ने बताया कि बेस्ट ने ‘चलो’ ऐप के साथ १०० बसों के लिए करार किया, १२ साल तक ‘चलो’ के साथ हुए इस समझौते में बेस्ट ने उसे पहले प्रत्येक बस के लिए ५० लाख अर्थात ५० करोड़ रुपए दिए। अब तक ८० बसें ही मिलीं। २० बसें अब तक नहीं आई हैं। राज्य सरकार से भी सब्सिडी ली गई और आश्चर्य यह है कि यह बस सेवा से सालाना मात्र १ करोड़ रुपए का कमाई हो रही है।
इस बारे में सदस्य अजय सिंह ने बताया कि यह बेस्ट की सीधे सीधे लूट है। ५० करोड़ रुपए खर्च करके सालाना एक करोड़ की कमाई और १२ साल में हमें सिर्फ १२ करोड़ रुपए ही मिलेंगे। मतलब साफ-साफ नुकसान है। यह करार क्यों किया गया, किसके दबाव में किया गया और किसके फायदे के लिए किया गया? इस बड़े घोटाले की जांच होनी चाहिए। इस मामले की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा हम लोगों ने जांच करने की मांग की है। इस बारे में रहमान गुप्ता ने कहा कि उन्होंने दिसंबर २०२२ में करार होने के बाद कंपनी से छह महीने तक एक रुपया नहीं लिया और जून २०२३ से ४ प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी शुरू हुई। इन्हें अणिक और मरोल डिपो में १०० विद्युत बसों की पार्किंग के लिए नाममात्र शुल्क पर जगह उपलब्ध कराने का फैसला भी जांच के दायरे में हो। गुप्ता ने कहा कि बेस्ट पहले से आर्थिक संकट से जूझ रही है, इसके बावजूद निजी कंपनी को इतनी बड़ी वित्तीय सुविधा भ्रष्टाचार ही है। इसकी जांच होनी चाहिए।

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