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महायुति राज में मंडराया ‘खूनी’ संकट… मुंबई में हुई ब्लड की कमी!

– शहर में बचा है सिर्फ १,१०१ यूनिट

-मरीजों को ब्लड बैंकों के काटने पड़ रहे चक्कर

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

जिस मुंबई शहर में हर पल लाखों सपने बुने जाते हैं, उसी में अब महायुति सरकार की कथित लापरवाही के चलते ब्लड बैंकों में खून की भीषण कमी से अपनों को बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। आलम यह है कि शहर के पास मात्र १,१०१ यूनिट रक्त शेष बचा है और कई ब्लड ग्रुप्स जहां आउट ऑफ स्टॉक हो चुके हैं, वहीं बचे हुए एक-एक यूनिट खून के लिए मरीजों के परिजन ब्लड बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार की ओर से इस ‘खूनी’ संकट को दूर करने के लिए तत्काल कोई बड़ा उपाय होता दिखाई नहीं दे रहा है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्वास्थ्य सेवाएं खतरे में हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर के ब्लड बैंकों में कुल रक्त भंडार घटकर मात्र १,१०१ यूनिट रह गया है। यह आंकड़ा मुंबई की विशाल आबादी के अनुपात में बेहद चिंताजनक है। आलम यह है कि ब्लड बैंकों में कई जरूरी ब्लड ग्रुप पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, जिसके कारण मरीजों के परिजनों को ब्लड बैंकों के अनवरत चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बी निगेटिव, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव जैसे दुर्लभ रक्त समूहों का स्टॉक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। परिषद ने इसे लेकर सभी रक्त केंद्र प्रमुखों को आपात निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इस विकट संकट के लिए कौन जिम्मेदार है और महायुति सरकार की स्वास्थ्य नीति कहां चूक गई।
राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रक्त की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई है। बताया गया है कि केईएम अस्पताल में बी पॉजिटिव ६, एबी पॉजिटिव ४, एबी निगेटिव २, ओ निगेटिव १, नायर अस्पताल में ए निगेटिव ६, एबी पॉजिटिव ४, एबी निगेटिव १, ओ निगेटिव ३, सायन अस्पताल में ए निगेटिव शून्य, बी निगेटिव ६, एबी निगेटिव १, ओ निगेटिव १, कांदिवली शताब्दी में केवल ए पॉजिटिव १ यूनिट, बाकी सभी शून्य, भाभा में बी पॉजिटिव १ यूनिट, जबकि अन्य सभी शून्य है। इसी तरह राजावाड़ी अस्पताल में कुल १२ यूनिट है, जबकि ओ निगेटिव अनुपलब्ध है। जे.जे. में ए निगेटिव ५, बी निगेटिव २, एबी पॉजिटिव ७, ओ निगेटिव ४, जी.टी. अस्पताल में ए निगेटिव ५, बी निगेटिव २, एबी पॉजिटिव ७, ओ निगेटिव ४, कामा में कुल ९ यूनिट है, जिसमें ओ निगेटिव नहीं है। सेंट जॉर्ज में केवल ११ यूनिट में ओ पॉजिटिव १०, एबी पॉजिटिव १ है।
परिषद के सहायक संचालक डॉ. पुरुषोत्तम पुरी ने सभी रक्त केंद्र प्रमुखों को पत्र जारी कर तत्काल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि कॉलेजों और स्कूलों की छुट्टियों के कारण ब्लड डोनर्स की संख्या घटी है, जिससे स्टॉक कम हुआ है। अब सामाजिक संस्थाओं की मदद से शिविर आयोजित किए जाएंगे।
अस्पतालों में हाहाकार, मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं
कई अस्पतालों में रक्त की अनुपलब्धता के चलते सर्जरी स्थगित करनी पड़ी है। बी निगेटिव और ओ निगेटिव समूह के मरीजों के परिजन रक्त की तलाश में एक केंद्र से दूसरे केंद्र भटक रहे हैं। कई अस्पतालों में ओ निगेटिव और बी निगेटिव रक्त वाले मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ी है। रक्तदान की अपील अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से पैâल रही है।

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