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गजब सरकार… महिला अस्मिता का अपमान…छात्राओं, बिना प्रेग्नेंसी टेस्ट हॉस्टल नहीं लौटना!

१३ साल से ऊपर की छात्राओं के लिए सरकार ने जारी किए निर्देश
रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र के गर्ल्स हॉस्टल और छात्रावासों में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ कथित तौर पर अपनाए जा रहे एक नियम ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और सरकार की संवेदनशीलता ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया हैं। छुट्टी से वापस हॉस्टल या छात्रावास लौटने वाली १३ वर्ष से अधिक उम्र की छात्राओं से गर्भधारण परीक्षण (प्रेग्नेंसी टेस्ट) करना अनिवार्य किया गया है, बिना प्रेग्नेंसी टेस्ट उन्हें हॉस्टल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, ऐसा आरोप सामने आया है। इस मामले को लेकर छात्राओं और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
मामला इसलिए और गंभीर है क्योंकि आदिवासी आश्रमशालाओं में बड़ी संख्या में नाबालिग छात्राएं पढ़ती हैं। ये छात्राएं त्योहारों अथवा अन्य छुट्टियों में अपने परिवार के पास जाती हैं और छुट्टी समाप्त होने के बाद वापस विद्यालय या छात्रावास लौटती हैं। आरोप है कि वापसी के समय उन्हें सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल से गर्भधारण परीक्षण कराने के लिए कहा जाता है। छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था उनके सम्मान, निजता और मानसिक गरिमा पर सीधा आघात करती है।
महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग के अनुसार, राज्य में सरकारी और अनुदानित आश्रमशालाओं का बड़ा नेटवर्क है, जहां आदिवासी विद्यार्थियों को आवास, भोजन और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। लेकिन उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी विभाग की है इस लिए विभाग उनकी जांच चाहता है। बता दें कि यह विवाद अचानक सामने नहीं आया है। पिछले कुछ वर्षों में आश्रमशालाओं और आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं से गर्भधारण परीक्षण कराए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।
बेटियों की पढ़ाई या उनकी निजता की निगरानी?
अब सितंबर में छात्राओं के छुट्टी पर जाने से पहले यह विवाद दोबारा सामने आने से महायुति सरकार की व्यवस्था कटघरे में है। विपक्ष के कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि सरकार यदि इस तरह की व्यवस्था को नियम का हिस्सा मानती है तो उसे उसका स्पष्ट कानूनी और प्रशासनिक आधार सार्वजनिक करना चाहिए।

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