सामना संवाददाता / नई मुंबई
नई मुंबई नगरपालिका का बहुप्रतीक्षित २,१०० करोड़ रुपए का ‘वेस्ट टू एनर्जी’ (कचरे से ऊर्जा) प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में है। वर्क ऑर्डर (कार्यादेश) मिलने के दस महीने बाद भी काम शुरू न होने के कारण मामला मुंबई हाई कोर्ट तक पहुंच गया था। अब महानगरपालिका ने अदालत को आश्वासन दिया है कि अगले तीन महीनों के भीतर इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया जाएगा।
वर्क ऑर्डर दिए जाने के बावजूद स्थानीय राजनीतिक विरोध के कारण प्रोजेक्ट में देरी हो रही थी। इसके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता पांडुरंग तीर्थे ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान महानगरपालिका ने तीन महीने में काम शुरू करने का भरोसा दिया। मनपा सूत्रों के मुताबिक, यदि सार्वजनिक हित के इस प्रोजेक्ट में कोई बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तुर्भे लैंडफिल साइट पर बननेवाले इस प्लांट को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संभावित प्रदूषण, धुएं और उससे होने वाले श्वसन रोगों (दमा, खांसी) पर चिंता जताई थी। हालांकि, नई मुंबई मनपा के शहर अभियंता शिरीष आरदवाड़ के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित है। कचरा जलने से निकलने वाले धुएं को प्रोसेस करके १०० मीटर से भी ऊंची चिमनियों के जरिए छोड़ा जाएगा, जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसका असर नगण्य होगा। आईआईटी बॉम्बे ने भी इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जांच की है।
