-३९,१११ ढांचों की कार्रवाई पर आपत्ति
-स्थायी समिति में पार्षदों ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर अब मनपा प्रशासन और निर्वाचित नगरसेवक आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने १ अक्टूबर से बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की है, लेकिन स्थायी समिति की बैठक में पार्षदों ने ही कार्रवाई की प्रक्रिया और चयन पर सवाल खड़े कर दिए। सवाल सिर्फ अनधिकृत निर्माण का नहीं, बल्कि यह भी है कि कार्रवाई का पैमाना और निशाना तय करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है?
मनपा ने १ अक्टूबर से तीन महीने का विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत करीब ३९,१११ कथित अनधिकृत आवासीय ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की योजना है। प्रशासन का तर्क है कि शहर में अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई जरूरी है।
लेकिन इतने बड़े अभियान के ऐलान के साथ ही सवाल भी खड़े हो गए हैं। किन इमारतों या संरचनाओं को कार्रवाई की सूची में शामिल किया गया है? सर्वे किस आधार पर हुआ? क्या प्रभावित लोगों को पर्याप्त सूचना दी जाएगी? इन्हीं सवालों को लेकर स्थायी समिति में नगरसेवकों ने प्रशासन से जवाब मांगा।
स्थायी समिति में नगरसेवकोेंं ने पूछा कि कार्रवाई के लिए संरचनाओं का चयन किस आधार पर किया गया। उनका कहना था कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना इतनी बड़ी कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं है।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई सीधे हजारों परिवारों को प्रभावित कर सकती है। यदि किसी निर्माण को अवैध घोषित किया गया है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। लेकिन यदि सूची, सर्वे और नोटिस की प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हों तो प्रशासन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
बुलडोजर चलेगा, लेकिन जवाबदेही किसकी?
मुंबई में अनधिकृत निर्माण लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय रहा है। एक तरफ बीएमसी का दावा है कि नियम तोड़ने वाले निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई होगी, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि कार्रवाई चुनिंदा तरीके से होती है।
