रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
हार्मोन्स की वजह से किशोरावस्था में होने वाले बदलाव को लेकर छात्राओं पर क्या असर पड़ता है? इसे लेकर मुंबई में 12 वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली एक छात्रा ने (जागरूक बेटी, स्वस्थ भविष्य) का देशव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बांबे स्काटिश स्कूल की 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली छात्रा अन्वी खट्टर ने वोकार्ड अस्पताल की डॉक्टर इंद्राणी सालुंखे के मार्गदर्शन में छात्राओं की जागरूकता के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया है। लड़कियों में होने वाले पहली बार मासिक धर्म के चलते जिस तरह से उनके मन में डर या झिझक पैदा होती है, जिसमें रक्तस्राव की वजह से उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। इस लक्षण को देखकर छात्राओं को घबराने या डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह एक प्राकृतिक परिवर्तन है। अन्वी छात्राओं से कहती हैं कि आप अपने शरीर को जानिए।अपनी झिझक तोड़िए और एक स्वस्थ आत्मविश्वास के साथ कल की ओर बढ़िए। अपने इस मंत्र को लेकर तन्वी देश के कई राज्यों में 20 हजार से अधिक छात्राओं से डिटिजल साधनों से संपर्क कर उन तक पहुंचने का प्रयास किया है। वे अपने इस अभियान को केरल, कश्मीर तथा लद्दाख की ओर ले जाने के प्रयास में जुटी है। देखना अब यह है कि वे अपने इस अभियान में कितना सफल होती हैं।
