मुख्यपृष्ठसमाचारराष्ट्र में अराजकता से विकास रुकता है- निम्बाराम

राष्ट्र में अराजकता से विकास रुकता है- निम्बाराम

सामना संवाददाता / राजस्थान 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर ‘राष्ट्र के नाम युवा मैराथन’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
कार्यक्रम में आरएसएस के राजस्थान क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम, जिला संघ चालक मानसिंह, नगर संघ चालक अनूप गाडिया, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारी महामंडलेश्वर डॉ. अर्जुनदास महाराज, जयपुर प्रांत सह-प्रचारक विशाल तथा डॉ. सुनील ढाका उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम ने बिना किसी आंदोलन या संगठन का नाम लिए कहा कि जब निजी स्वार्थों के कारण समाज को भ्रमित किया जाता है और विदेशी षड्यंत्रों के प्रभाव में आकर देश के आंतरिक विषयों को बाहर तक पहुंचाया जाता है, तब राष्ट्र की राष्ट्रीय, सामाजिक और आंतरिक सुरक्षा प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि जब समाज में अशांति और अराजकता का वातावरण बनता है, तो विकास की गति अवरुद्ध हो जाती है और आगे बढ़ने की ललक दब जाती है। इसलिए समाज का संगठित, संस्कारित और शक्तिशाली होना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “संगठन में शक्ति है, शक्ति से चमत्कार होता है और चमत्कार को दुनिया नमस्कार करती है।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत करियर के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण को भी अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं। उन्होंने कहा, “मेरा करियर केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि ‘कंट्री इज माय करियर’ की भावना भी होनी चाहिए।” उनका कहना था कि यदि राष्ट्र मजबूत और सुरक्षित नहीं होगा, तो व्यक्तिगत समृद्धि भी किसी काम की नहीं रहेगी।
निम्बाराम ने अपने संबोधन में आरएसएस के विरोधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को रोकने और समाप्त करने के अनेक प्रयास हुए। उन्होंने कहा, “101 वर्षों में हमने करके देखा। अनेक प्रकार की बाधाएं आईं, रोकने का प्रयास किया गया। कहा गया कि समाप्त कर देंगे, चार फीट जमीन में गाड़ देंगे, नामोनिशान नहीं रहेगा, हिंदुस्तान की एक इंच धरती पर भगवा नहीं फहराने देंगे। लेकिन ऐसे दावे करने वालों का ही नाम लेने वाला कोई नहीं बचा, जबकि राष्ट्रभक्ति के भाव से चलने वाला संगठन आज एक लाख से अधिक स्थानों पर शाखाओं और विभिन्न सामाजिक कार्यों के माध्यम से कार्य कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि संघ किसी के विरोध के लिए नहीं, बल्कि भारत माता के लिए अच्छे नागरिक तैयार करने और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से कार्य कर रहा है।
निम्बाराम ने कहा कि देश के सामने जनसंख्या असंतुलन (डेमोग्राफी इंबैलेंस), नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियां हैं। इनका समाधान तभी संभव है, जब युवा राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाज के मुद्दों पर एकजुट होकर कार्य करें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का अर्थ केवल इमारतें बनाना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सद्भाव, नागरिक कर्तव्यों का पालन, स्वदेशी सोच और श्रेष्ठ आचरण के माध्यम से समाज को मजबूत बनाना है।

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