एड. राजीव मिश्र, मुंबई
रामअजोर, सुबह से अखबार के पन्ना-पन्ना चाटि रहें हैं पर उनके ऊ खबर नहीं मिलि रही है जेहिके खोज में सुबहिये से लगे हैं। तब कउनउ ओर से नन्हें गुरु आइ गए पर रामअजोर हैं कि अखबार से आंखय नही हटाय रहें हैं। आखिर उबियाय के नन्हें गुरु रामअजोर से पूछे, का हो अजोर! अइसन कउन खबर छपी अहइ जेहिके लिए तुम सामने बइठे मनई तक के नहीं देखत हौ? अरे का बताई नन्हें, खबर नही सुनव का? कउन खबर? अरे राम मंदिर में दान अउर चढ़ावा के चोरी होइ रही है। राम-राम-राम कउन जमाना आइ गवा है। मनई भगवान के घर से भी चोरी कइ रहा है। अइसन मनई के तो नरक में भी जगहा न मिली। कइसन बात करत हौ रामअजोर! भगवान के घर से केउ चोरी नही करत हैं जेहिका जरूरत होत है उ अपने हिसाब से लेइ जात है यहिका चोरी थोड़व कहा जाई। अच्छा तो का कहा जाई! अब एक बात समझो, तुम जब मंदिर जात हौ तो करत हौ? का करत हौ के का मतलब है? जाई थ तो फूल-माला, फल-फरुट और मिठाई-पेड़ा चढ़ाई थ भगवान के। अच्छा ओहिके बाद जवन पंडा होत हैं उ का करत हैं तुम्हरा चढ़ावा लिहे के बाद? चढ़ावा लिहे के बाद एक ठो मिठाई अउर फल चढाय के बाकी हमय वापिस कइ देत हैं। इहै….इहै तो समझय वाली बात अहइ, अच्छा छोड़व, भगवान के अगर दिन भर में एक कुंटल मिठाई और दुइ कुंटल फल चढ़ा तो ओहिके का होत है। का होत है के का मतलब है, सब भक्तन में परसाद की तरह बांटा जात। बस इहै तो समझय के बात है, भगवान के जवन पहिनय-ओढ़य के उ तो उनके साथ हमेशा रहबै करत थ, अब रहि गवा बचा चढ़ावा उ जेहि चेलन के जरूरत रही उ लेइ गएं, यहिमा इतना बवाल काटे के का जरूरत है। अरे मर्दे, मतलब भगवान के मंदिर से सोना-चांदी, रुपिया, पइसा सब उठाय लेइ जइहौ? तुम केतना चंदा दिए हौ आज तक? हम तो अबय कुछौ नही दिए हैं। तो तुमका हिसाब भी लेवय के अधिकार नही है जे चंदा देई उहै हिसाब लेई। इतना कहिके नन्हें गुरु निकरि गए अउर रामअजोर अबहि तक भौचकियाय के बइठे हैं।
