सामना संवाददाता / मुंबई
वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक निर्माण कार्य में देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। शुरुआत में इसकी लागत ११,३३२.८२ करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन अब यह लागत बढ़कर १८,१२०.९६ करोड़ रुपए हो गई है, यानी ६,७८८.१४ करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। वहीं २०२५ के मध्य तक सिर्फ ६० फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो पाया है।
यह परियोजना वर्सोवा और बांद्रा के बीच एक हाई-स्पीड सड़क मार्ग प्रदान करने का उद्देश्य रखती है, जिससे यात्रा का समय कम होगा और मौजूदा उपनगरीय सड़कों पर जाम की समस्या दूर होगी।
बता दें कि राज्य सरकार ने इस परियोजना की जिम्मेदारी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को सौंपी है। यह सी लिंक ९.८ किलोमीटर लंबा, ४+४ लेन वाला है, जो मुंबई के पश्चिमी तटीय किनारे के समानांतर होगा। यह बांद्रा, आर्ट्स क्लब, जुहू और वर्सोवा को जोड़ेगा। यह समुद्र तट से लगभग ९०० से १,८०० मीटर की दूरी पर स्थित होगा और इसमें कई केबल-स्टे ब्रिज और इंटरमीडिएट कनेक्टर्स होंगे, जिससे आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का सुचारु संचालन संभव होगा। परियोजना में बांद्रा कनेक्टर (२.२ किमी), कार्टर रोड कनेक्टर (२.६ किमी), जुह-कोलीवाड़ा कनेक्टर (२.६ किमी) और नाना नानी पार्क, जुहू सर्कल तथा वर्सोवा साइड की ओर विस्तार शामिल हैं। यात्रियों के लिए यह सी लिंक वर्सोवा से बांद्रा तक की यात्रा समय ४५-६० मिनट से घटाकर केवल १०-१५ मिनट कर देगा। यह तटीय मार्ग प्रदान करके वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और एस.वी. रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर दबाव कम करेगा, जिन पर आमतौर पर भारी ट्रैफिक रहता है।
कोस्टल रोड और सी लिंक के विस्तृत नेटवर्क का हिस्सा
– ४० फीसदी काम बाकी- एमएसआरडीसी के अनुसार, अगस्त २०२५ तक सी लिंक का ६० प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
– मुंबईकरों की यात्रा होगी सुगम- यह परियोजना मुंबई में यात्रा को आसान बनाने के लिए तैयार किए जा रहे कोस्टल रोड और सी लिंक के विस्तृत नेटवर्क का हिस्सा है।
– भायंदर तक होगा विस्तार- भविष्य में यह दहिसर और भायंदर तक के विस्तार से जुड़ेगा, जो वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे का समानांतर मार्ग बनाएगा।
– एक्सप्रेस हाईवे का एक वैकल्पिक मार्ग- एमएसआरडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का उद्देश्य मुंबई को वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे का एक वैकल्पिक मार्ग देना है।
– उपनगरीय कनेक्टिविटी होगी अच्छी- समुद्री निर्माण और लागत बढ़ोतरी की चुनौतियों के बावजूद यह परियोजना उपनगरीय कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने में प्राथमिकता रखती है।
