श्रीमद्भगवदगीता में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने स्वयं को वसंत माना है। वसंत का तात्पर्य है हर्षोल्लास से परिपूर्ण होना। कहा जाता है कि इस ऋतु में भगवान श्री कृष्ण स्वयं भूलोक पर प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होते हैं। ब्रज क्षेत्र में तो वसंत ऋतु के समय राधा गोविंद का उत्सव पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ उल्लासमय वातावरण में मनाया जाता है। कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्य जीवन को सुखमय बनाना है, जबकि सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानतारूपी अन्धकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न करना है। बसंत पंचमी को जीवन की शुरुआत का दिन माना जाता है। यह दिन खुशियों के आगमन का दिन है। बसंत का मौसम बहार का मौसम होता है, इस माह में खेतों में चारों ओर पीली सरसों सबका मन मोह लेती है। रंग- बिरंगी फूल खिलने लगते है। बसंत पंचमी के दिन को रंगों, खुशियों के स्वागत के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन कामदेव की भी पूजा- उपासना भी की जाती है। सभी छ: ऋतुओं में से बसंत ऋतु सबसे अधिक मनमोहक होती है। कामदेव और देवी रति गृहस्थ जीवन में प्रेम, सुख, समृद्धि और शांति के प्रतीक हैं क्योंकि जहां ये तीनों गुण विद्यमान होते हैं, उनके गृहस्थ जीवन के सफल होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है। इस प्रकार गृहस्थ जीवन के लिए वसंत पंचमी प्रेम और समृद्धि लेकर आती है, वहीं विद्यार्थियों एवं ब्रह्मचारियों के लिए यह ज्ञान की साधना का महापर्व है।
– शीतल अवस्थी
