-केईएम के डीन के लिए लग गए कई बैनर
-तीन विभागों का प्रशासन नहीं संभाल सकता एक शख्स
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल में डीन पद की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभी तक डीन पद की नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही भाजपा के परेल मंडल की ओर से लगाए गए पोस्टरों में डॉ. हरिश पाठक को डीन पद पर नियुक्ति की बधाई दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक डीन पद की पोस्टिंग का आधिकारिक आदेश भी जारी नहीं हुआ है और स्वास्थ्य समिति व महासभा की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। वर्ष २०२२ से अकादमिक डीन और फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. पाठक अब तीसरे बड़े पद की चर्चा में हैं। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा परेल मंडल की ओर से लगाए गए पोस्टर में केईएम अस्पताल के डीन पद पर डॉ. हरिश पाठक की नियुक्ति पर हार्दिक बधाई लिखी गई है। पोस्टर पर परेल मंडल अध्यक्ष सतीश तिवारी का नाम भी प्रमुखता से छपा हुआ है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि डीन पद की नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। नियमानुसार, पहले प्रस्ताव स्वास्थ्य समिति के सामने रखा जाता है, उसके बाद उसे महासभा की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। महासभा से मंजूरी मिलने के बाद ही नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी किया जाता है। सूत्रों के अनुसार डॉ. हरिश पाठक वर्ष २०२२ से अकादमिक डीन के पद पर कार्यरत हैं और इसके साथ ही वे फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब डीन पद की चर्चा के बीच यह मुद्दा भी उठने लगा है कि एक ही व्यक्ति तीन-तीन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी वैâसे संभाल सकता है। बता दें कि नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइन के अनुसार, एक व्यक्ति को एक ही प्रशासनिक पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। ऐसे में डॉ. पाठक के पास पहले से मौजूद जिम्मेदारियों के बावजूद डीन पद को लेकर हो रही राजनीतिक सक्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल से जुड़े कई कर्मचारियों और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकारी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही राजनीतिक पोस्टरों के जरिए बधाइयों की बारिश होना प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि स्वास्थ्य समिति और महासभा की प्रक्रिया के बाद अंतिम निर्णय क्या लिया जाता है। सरकारी मंजूरी और आधिकारिक आदेश से पहले ही शुरू हुए इस राजनीतिक प्रचार ने केईएम अस्पताल की नियुक्ति प्रक्रिया को विवादों के घेरे में ला दिया है। इस पूरे मामले पर एड. मेराज शेख ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक स्वास्थ्य समिति और महासभा की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक किसी भी नियुक्ति को अंतिम नहीं माना जा सकता। ऐसे में पहले से बधाई वाले पोस्टर लगना पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। अगर एनएमसी की गाइडलाइन में एक व्यक्ति एक पद का नियम है तो फिर तीन-तीन जिम्मेदारियां वैâसे दी जा रही हैं, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
