मुख्यपृष्ठनए समाचारबढ़ते उत्पीड़न के बीच इस सरकार का महिला सुरक्षा की बात करना...

बढ़ते उत्पीड़न के बीच इस सरकार का महिला सुरक्षा की बात करना हास्यास्पद है!.. रोहित पवार का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य में लड़कियों पर अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। नसरापुर, केज और पालघर की घटनाएं अभी ताजा ही थीं कि पुणे में एक दादा द्वारा अपनी ही नातिन के साथ दुष्कर्म का प्रयास किए जाने की बेहद शर्मनाक घटना सामने आई। राज्य में रोज कहीं न कहीं इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, जो बेहद आक्रोश पैदा करने वाली हैं। राज्य की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और सरकार पूरे साल चुनाव, प्रचार और जश्न में व्यस्त है। इस तरह का जोरदार हमला करते हुए राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने चुनावी टारगेट की तरह कोई आंकड़ा तय कर रखा है कि इतनी-इतनी बच्चियों के साथ अत्याचार होने के बाद ही ‘शक्ति कानून’ लाया जाएगा?
पुणे जिले के भोर तालुका के नसरापुर में ६५ वर्षीय आरोपी द्वारा चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ताजा ही थी कि इसी तरह की एक और घटना पुणे के पर्वती इलाके में सामने आई। वहां ५० वर्षीय व्यक्ति ने ९ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। हालांकि, सतर्क नागरिकों की वजह से बच्ची आरोपी के चंगुल से बच गई। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने रास्ता रोको आंदोलन कर प्रशासन से जवाब मांगा। पिछले कुछ दिनों से लगातार नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच विधायक रोहित पवार ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि क्या सरकार ने यह तय कर लिया है कि और कितनी बच्चियों के साथ अत्याचार होने के बाद ‘शक्ति कानून’ लागू किया जाएगा? मेरी सरकार से मांग है कि इस मुद्दे पर तुरंत विशेष अधिवेशन बुलाया जाए। यदि यह संभव न हो तो राज्य के दरिंदों पर लगाम लगाने के लिए तुरंत शक्ति कानून का अध्यादेश लाया जाए।
‘कानून का डर नहीं’
नसरापुर, केज, पालघर और पर्वती जैसी लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं बचा है। सरकार आखिर और कितनी बच्चियों की बलि चढ़ने देगी? क्या अब भी सरकार जागेगी नहीं? सरकार को जनता रहनुमा कहती है तो फिर तुरंत एकदिवसीय विशेष अधिवेशन बुलाकर शक्ति कानून लागू क्यों नहीं किया जा रहा? अध्यादेश क्यों नहीं लाया जा रहा? इस तरह के सवाल रोहित पवार ने पूछे।

अन्य समाचार