-म्यूल अकाउंट चलानेवाले गिरोह के १० क्रिमिनल दबोचे गए
-गुजरात से साइबर क्राइम ऑपरेट कर रहा था गिरोह
सामना संवाददाता / मुंबई
गुजरात में एक बड़ा साइबर क्राइम नेटवर्क बेनकाब हुआ है, जिसका कनेक्शन हाई-प्रोफाइल बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से भी जुड़ता नजर आ रहा है। गांधीनगर में साइबर सेंटर ऑफ एक्सलेंस ने ‘ऑपरेशन म्यूल २.०’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए १० आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह न सिर्फ फर्जी खातों के जरिए ठगी करता था, बल्कि हत्या के आरोपियों को भी ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराता था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने ५३.५५ करोड़ रुपए की भारी-भरकम धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
साइबर सेंटर ऑफ एक्सलेंस के एसपी राजदीप सिंह झाला के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में पुलिस ने आणंद में सक्रिय एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। इस ऑपरेशन के दौरान कुल १३२ साइबर अपराध मामलों को सुलझाया गया, जो इस गिरोह की व्यापक गतिविधियों को दर्शाता है। गिरोह के पास अत्याधुनिक तकनीकी नेटवर्क था, जिससे वे आसानी से लोगों को धोखा देते थे। आरोपी अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर ठगी करते थे और पैसे को फर्जी खातों में जमा कर देते थे। इन खातों के जरिए कुल ५३.५५ करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया, जो साइबर अपराध की बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़ा कनेक्शन है। गिरफ्तार आरोपियों ने इस हत्याकांड के आरोपियों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराया था। यह अकाउंट असल में ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, इस खाते के जरिए अपराधियों को पैसे ट्रांसफर करने और छुपाने में मदद मिली। इस खुलासे के बाद पुलिस ने इस एंगल से जांच और तेज कर दी है। गिरोह का काम करने का तरीका बेहद तकनीकी और संगठित था। आरोपी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका भी अलग-अलग थी, जिससे यह साफ होता है कि यह एक संगठित गैंग था। तीन मुख्य आरोपी ऐसे थे, जिनके नाम पर बैंक खाते खोले गए थे। वहीं तीन अन्य लोग इन खातों का प्रबंधन करते थे और लेन-देन को नियंत्रित करते थे। बाकी आरोपी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को इधर-उधर करने और उसे साफ करने का काम संभालते थे। इस तरह पूरे गिरोह ने मिलकर १९७ बैंक खातों का संचालन किया। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के खिलाफ मिली सफलता से राज्य में साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
जांच एजेंसियां सतर्क
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े इस कनेक्शन के बाद जांच एजेंसियां और भी सतर्क हो गई हैं। बाबा सिद्दीकी की बांद्रा में खुलेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के तार और किन-किन राज्यों या अपराधों से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
