मुख्यपृष्ठनए समाचारसौ दिन भेड़-बकरियों की जिंदगी से बेहतर, एक दिन बाघ की तरह...

सौ दिन भेड़-बकरियों की जिंदगी से बेहतर, एक दिन बाघ की तरह जियो!-उद्धव ठाकरे

 -‘एक होती माया’ पुस्तक का शानदार विमोचन

सामना संवाददाता / मुंबई

ताडोबा की प्रसिद्ध बाघिन ‘माया’ के जीवन पर आधारित `एक थी माया’ पुस्तक का विमोचन गुरुवार को शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के हाथों संपन्न हुआ। प्रभादेवी स्थित रवींद्र नाट्य मंदिर में अनंत सोनवणे द्वारा लिखित ‘एक होती माया’ पुस्तक के विमोचन के दौरान उद्धव ठाकरे ने वन्यजीवों के प्रति अपने प्रेम और जंगल से जुड़े अनुभवों को साझा किया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि काफी दिनों बाद किसी सभ्य विषय से जुड़े कार्यक्रम में आया हूं। जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसे देखकर कभी-कभी लगता है कि हमारा जीवन ही हिंसक वन्य जीवन बन गया है। उन्होंने पुस्तक के लेखक अनंत सोनवणे, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. कृष्णमेघ कुंटे और प्रकाशक मेहता पब्लिशिंग हाउस की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसा विषय चुना है, जिसने लोगों में ताडोबा जाने की इच्छा पैदा कर दी है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह बचपन से ही बाघों और बाघिनों के बीच पले-बढ़े हैं। जंगल में जाने का उनका सिलसिला अब भले ही रुक गया हो, लेकिन जंगल और वन्यजीवों के प्रति उनका प्रेम आज भी कायम है। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र तेजस ठाकरे भी इस रुचि को आगे बढ़ा रहे हैं और केवल वन्यजीवों की तस्वीरें लेने के बजाय लोगों को कीट-पतंगों, तितलियों, सांपों और पेड़-पौधों की पहचान भी कराते हैं। बाघिन ‘माया’ से अपनी पहली मुलाकात का अनुभव सुनाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि एक बार ताडोबा में उन्होंने और तेजस ने एक बाघिन को पानी पीते देखा था। पानी पीने के बाद वह बाघिन सीधे उनकी खुली जीप की ओर आई और उन्हें वहां से जाने दिया।

अन्य समाचार