सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के १० अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र में पुलिस कार्रवाई पर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने फोन कर दिल्ली जाने की योजना पूछी, कुछ के घर पहुंची और प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दी। चंद्रपुर में कुछ समर्थकों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा १६८ के तहत नोटिस दिए गए।
मुंबई के दो कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें पुलिस थाने में कई घंटे रखा गया और दिल्ली जाने के बारे में पूछताछ हुई। पुलिस ने हिरासत के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें नियमित पूछताछ के लिए बुलाया गया था। डीजीपी कार्यालय के अधिकारी ने भी कुछ मामलों में नोटिस जारी करने की बात स्वीकार की, लेकिन राज्य में किसी को हिरासत में लेने से इनकार किया। सीजेपी का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में बुलाया गया है। पुलिस की निवारक कार्रवाई कानून-व्यवस्था के नाम पर हुई या प्रदर्शन में जाने से रोकने का दबाव है यह सवाल अब नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा और आवागमन के अधिकार से जुड़ गया है।
`दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे? पुणे आइए’
दिल्ली में १० अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले एनसीपी विधायक रोहित पवार ने अपील की है कि वहां नहीं पहुंच पाने वाले लोग १० और ११ अक्टूबर को पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हों। दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने और रेल सेवाओं पर लगी पाबंदियों के बीच रोहित पवार ने कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं जा पा रहे, वे पुणे पहुंचें।
