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संपादकीय : बदमाशी

राहुल गांधी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके झटके बीजेपी को महसूस होने लगे हैं, लेकिन बीजेपी इस सदमे से उबरने लगी है। यानी बीजेपी अपने पुराने बदमाशी भरे रवैये पर उतर आई है। राहुल गांधी और विपक्षी दलों के सांसद बृहस्पतिवार को राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पहुंचे, तो बीजेपी की महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय के सामने जमा होकर राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। `जंतर-मंतर’ पर बुधवार के प्रदर्शन में पुलिस प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को घसीटकर ले गई और गाड़ी में ठूंस दिया। विपक्षी दलों के दूसरे सांसदों को भी इसी तरह उठाकर ले जाया गया, मुकद्दमे दर्ज किए गए, लेकिन दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के सामने बदजबानी में प्रदर्शन करने वालों को गृह मंत्रालय ने पूरी छूट दी। इस तरह बीजेपी अपने मूल बदमाशी रवैये पर उतरकर लोकतंत्र की रक्षा करने वालों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। भारत का चीफ इलेक्शन कमिश्नर, मोदी-शाह का चाटुकार है। चुनावी तंत्र में कई धांधलियां करके ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को जिताया, यह साफ होने के बावजूद बीजेपी ज्ञानेश कुमार के समर्थन में ढोल पीट रही है, जो चिंताजनक है। प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता पर जमे रहने के २५ साल पूरे होने का जश्न बीजेपी और उसके सहयोगी दल मना रहे हैं। मोदी के सेवा पर्व का बड़ा विज्ञापन-अभियान चल रहा है। इन २५ सालों में मोदी ने भारत के लोकतंत्र को श्मशान पहुंचा दिया और इसके खिलाफ जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रही है। मुरली मनोहर जोशी बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। वे बीजेपी के अध्यक्ष थे। मौजूदा माहौल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, `लोगों के लिए लोगों द्वारा बनाई गई सरकारें कभी नष्ट नहीं होंगी।
लिंकन ने यह भविष्यवाणी
दो सौ साल पहले ही कर दी थी। अब मैं कह रहा हूं कि लोगों के लिए, लोगों द्वारा और लोगों की बनाई सरकारें पृथ्वी से तब तक नष्ट नहीं होंगी, जब तक चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो रहे हैं, सरकार जवाबदेही से काम कर रही है, नौकरशाही पारदर्शी है, विपक्ष संवेदनशील और जिम्मेदार है और एक साफ वैकल्पिक कार्यक्रम है और यह सब संविधान के दायरे में होना चाहिए। अगर संविधान का उल्लंघन हो रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। लोकतंत्र इसी सिद्धांत पर टिका है।’ लेकिन मुरली मनोहर जोशी का बताया एक भी सिद्धांत मोदी के `सेवा’ काल में नहीं बचा है। संवैधानिक पद पर बैठकर राष्ट्रविरोधी काम करने वालों को मोदी काल में खास संरक्षण मिल रहा है। चाहे वे राज्यपाल हों, चुनाव आयोग हो या लोक सेवा आयोग हो। हर अपराधी की पुश्तपनाही की जा रही है और इन सबके खिलाफ आवाज उठाने वालों को गुनहगार ठहराकर गिरफ्तार किया जा रहा है, यह दिल्ली के घटनाक्रम से साफ दिखता है। कांग्रेस मुख्यालय और प्रदेश कार्यालयों के सामने प्रदर्शन करने के निर्देश बीजेपी ने अपनी महिला मोर्चा को दिए। विपक्ष के उग्र आंदोलनों से पुलिस बल बेहाल हो चुका है। इसीलिए यह नया फंडा शुरू किया गया है। अब यह भी सामने आ रहा है कि जंतर-मंतर पर `कॉकरोच’ आंदोलन से निपटने के लिए सरकार ने बजरंग दल के दो एक लाख सशस्त्र लोगों को दिल्ली में बुलावा भेजा है। १० तारीख से `कॉकरोच’ जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन करने वाले हैं। ये कॉकरोच पुलिस की लाठियों और बंदूकों की परवाह नहीं करते, यह अनुभव होने के बाद अमित शाह ने बजरंग दल के दो एक लाख लड़कों को कॉकरोच से लड़ने के लिए जंतर-मंतर पर बुलाया है। यह बात बेहद खतरनाक है। यानी जंतर-मंतर पर
खून-खराबा करके
`लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन को खत्म करना है। ऐसा करना असंवैधानिक है। सियासी गिरोहों को ताकत देकर लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन को खत्म करने का क्या मतलब है? या तो पुलिस ने तानाशाही भरे आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है या पुलिस आंदोलनकारियों की तरफ झुक गई है। सरकार से भरोसा उठ चुका है। ऐसे समय में `प्राइवेट आर्मी’ का इस्तेमाल करके सड़कों पर मारपीट करवाना अराजकता को दावत देने जैसा है। ऊपर से सीजेपी के इस आंदोलन को अब दिल्ली पुलिस ने इजाजत देने से भी मना कर दिया है। दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को सरकार ने रद्द कर दिया है। दिल्ली आंदोलन के लिए आ रहे युवाओं को भी रोककर गिरफ्तार किया जा रहा है। लोकतंत्र द्वारा युवाओं को दिए गए आंदोलन के हक को कुचलने के लिए दमन की किसी भी हद तक जाने का केंद्र के हुक्मरानों का इरादा इससे साफ हो गया है। मोदी-शाह की सरकार विपक्षी सांसदों के सिर निजी गिरोहों से फोड़ने को तैयार है, लेकिन ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने को तैयार नहीं है। यह हिटलर से भी ज्यादा खतरनाक है। विपक्ष राजघाट पर शांति से प्रदर्शन कर रहा है, तो सरकार को उससे भी तकलीफ हो रही है। कॉकरोच आंदोलन को हर तरफ से कुचलने की कोशिश सरकार कर रही है। दिल्ली की सड़कों पर हुड़दंग मचाकर शांति भंग करने के लिए सरकार खुद संविधान से द्रोह कर रही है। ज्ञानेश कुमार मोदी-शाह के क्या लगते हैं, यह बात एक बार देश को पता चलने दीजिए। संविधान के दायरे को तोड़कर ज्ञानेश कुमार को बचाना ही असली देशद्रोह है। मोदी-शाह ने भारतीय लोकतंत्र को श्मशान पहुंचा दिया है।

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