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केबल चोरों के हवाले मुंबई की सुरक्षा!..कोस्टल रोड की लाइटें बंद, अंधेरे में सफर करने को मजबूर मुंबईकर

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की रफ्तार बढ़ाने के लिए बने कोस्टल रोड पर अगर रात के अंधेरे में सफर करना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस आधुनिक सड़क की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? केबल चोरी और बंद पड़ी लाइटों की समस्या ने सड़क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। जिस सड़क पर सुरक्षित और सुगम सफर का भरोसा दिया गया, वहां रोशनी की कमी वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
कोस्टल रोड जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें बंद होना महज रखरखाव की छोटी-मोटी चूक नहीं माना जा सकता। रात में पर्याप्त रोशनी न होने से वाहन चालकों को सड़क की स्थिति समझने, मोड़ पर सतर्क रहने और दूसरे वाहनों की गतिविधियों का अंदाजा लगाने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में केबल चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने और प्रकाश व्यवस्था बहाल रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की बनती है।
चोरों पर लगाम कब, प्रशासन जवाब कब देगा?
अगर केबल चोरी के कारण लाइटें बंद हो रही हैं, तो सवाल है कि संवेदनशील सड़क पर केबलों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? चोरी की घटनाओं का पता लगाने, दोषियों तक पहुंचने और दोबारा ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? साथ ही, खराब लाइटों की शिकायत मिलने पर उन्हें ठीक करने में कितना समय लगता है? बीएमसी और संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित हिस्सों में कितनी लाइटें बंद हैं, समस्या कब से बनी हुई है और उन्हें चालू करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। यदि निगरानी कैमरे भी बंद हैं, तो उनकी स्थिति और उन्हें ठीक करने की समयसीमा भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

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