प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
पूर्वांचल में लगन-बरात के मौसम एतना गरम बा कि जाड़ा के कवनो असर नइखे देखात। मोहल्ला अउरी टोला में हल्दी, मेहंदी आ संगीत के तैयारी त चलिए रहल बा, बाकि असल तैयारी त बेटी के बाप करेला।
उ बेचारा बराती लोगन के स्वागत में लूट जाला, बाकि लरिका के बाप और बराती मीन-मेख से नइखे बाज आवेला।
गांव में जब लगन चढ़ेला, त सबसे पहिले मिठाई वाला दुकान पर भीड़ बढ़ेला। छेना, लड्डू, बरफी, पेड़ा अउर किसम-किसम के मिठाई कटेला जइसे चुनाव में नोट, साड़ी अउर दारू बिकेला। मिठाई वाला के मन में खुशी एतना कि उ कहे लागेला लगन ना होखे त हमनी के दुकान पर ताला पड़ जाव। बाकि नकली पनीर, खोया अउर छेना बना के घराती-बराती के अपच कराई देला अउरी जेब नोट से भरी लेला। जबकि दूलहा अउर दुल्हिन के परिवार में तनाव शुरू रहेला कि कपड़ा अउर सोना के गहना कइसे चढ़ी, आ बरातिया के पेट कइसे भराई? काहे कि बरात के सबसे पहिला सवाल रहेला कि खाना में का बा?
बरात के दिन त लरिका के बाप के अलगई रुतबा रहेला। ओनकर भाव शेयर बाजार से भी ऊपर रहेला। लरिका के बाप बेटवा के बियाह में खादी के कपड़ा जरूर सियावे ला, बाकि उ पहिन के रंगा सियार भले लागेला। दूसरा तरफ दूलहा के गाड़ी लड़की के दुआरे पहुंचले से पहले मोबाइल वाला लाईव अउरी सेल्फी शुरू हो जाला। फुआ अउरी साली लोग सज-धज के एतना चमकेली कि दूलहन के मेकअपो शरमा जाला।
बराती लोग भी बड़ा तेज होला। जेकर घर में पूरा साल चना-चिवड़ा से काम चलत बा, उ ई दिन दही बड़े, गुलाबजामुन, मलाई-पराठा, रबड़ी-इमरती सब पेट में ऐसन धकसाता कि अस्पताल वाला कहे लगन के ई महीना में आईसीयू पूरा बुक रहेला। अइसन भी ना बुझी कि लईकी वाला कम चालाक बा। उ लोग भी पूरा साल के हिसाब ई दिन बराबर करेला। सबसे मजेदार त विदाई के टाइम होला। जब नाश्ता के साथ दक्षिणा भी मिलेला। लगन-बरात में बस एक चीज स्थायी बा दहेज पर लंबा भाषण, आ गुपचुप लिफाफा का लेन-देन। बाहर सब सादा शादी, अंदर सब भारी इन्वेस्टमेंट।
