-दूषित पानी पीने को मजबूर गरीब आदिवासी…जलजनित रोग फैलने का बढ़ा खतरा
सुरेश गोलानी / मुंबई
शहर के आदिवासी गांवों में पानी की भारी किल्लत को लेकर श्रमजीवी संघटना ने शुक्रवार को काशीमीरा से मीरा भायंदर महानगरपालिका के भायंदर-पश्चिम स्थित मुख्य प्रशासकिय कार्यालय तक हंडा मोर्चा निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। श्रमजीवी संघटना के महासचिव विजय जाधव, कार्यकारी अध्यक्ष सुल्तान पटेल और तालुका महिला अध्यक्ष सुमन लाबडे के नेतृत्व में निकाले गए इस मोर्चे में भारी संख्या में आदिवासी नागरिक खासकर महिलाएं खाली हंडे और झंडे लेकर शामिल हुईं और पानी की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। आंदोलनकर्ताओं के अनुसार, शहर के जीवत्व नगर, केसरी पाड़ा, शेमबाद पाड़ा, वडाचा पाड़ा, शक्ति नगर, चावला पाड़ा, मार्गलीपाड़ा और केलिचा पाड़ा सहित कई आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पीने के पानी की भारी किल्लत है। एक हंडे (घड़े) पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोजाना दुर्गम रास्तों से होते हुए कई किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ रहा है, लेकिन विकास और प्रगति का ढोल पीटने वाली भारतीय जनता पार्टी शासित मनपा नागरिकों को इससे वंचित रखा है। कुछ इलाकों में तो आदिवासी समाज गड्ढों में जमा दूषित एवं गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं, जिसके कारण गैस्ट्रो और अन्य जलजनित रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है।
खोखले वादे
ज्ञात हो कि केंद्र सरकार की ‘अमृत जल योजना’ के तहत हर नागरिक को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। मीरा-भायंदर शहर के कुल 21 आदिवासी गांवों के नागरिकों ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए ७५३ आवेदन जमा किए हैं। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। संगठन ने प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया है कि पहले कई बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है।
दूसरी तरफ शहर अभियंता दीपक खांबित ने श्रमजीवी संगठन को लिखे अपने पत्र में खुलासा किया है कि नई पाइप लाइन बिछाने का काम जारी है, लेकिन हाल ही में मंजूर किए गए विकास योजना डीपी में दर्शाए कई रास्तों पर जमीन मालिकों द्वारा आपत्ति के कारण कई जगहों पर काम रुका हुआ है। खांबित के अनुसार, संबंधित जमीन मालिकों से जल्द ही चर्चा करके हल निकाला जाएगा और एक महीने के भीतर काम पूरा करके पानी की आपूर्ती शुरू की जाएगी, तब तक आदिवासी गांवों में टैंकरों के माध्यम से मुफ्त पानी देने के अलावा सार्वजनिक तालाबों की नियमित सफाई और आवश्यकता अनुसार बोरेवेल से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है।
संघटना की मुख्य मांगें
२१ आदिवासी पाड़ों के ७५३ आवेदकों को तत्काल व्यक्तिगत जल कनेक्शन दिए जाएं, जिन आदिवासी इलाकों में समस्या अति गंभीर है, वहां पीने के पानी के लिए तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था हो, अन्यथा श्रमजीवी संघटना अपने इस जनहित आंदोलन को अधिक तीव्र रूप दिया जाएगा और उसकी जवाबदेही मनपा पर रहेगी।
