-नवीन सी. चतुर्वेदी
बत्तो तैनें एक बात नोट करी जैसें ही देवता सोय जामें त्यौहार’न की झड़ी लग जावै। हरियाली तीज, राखी, कृष्णजन्माष्टमी, गोविंदा आला रे, राधाअष्टमी, गणपति बाप्पा मोरया, नवरात्रि, रामलीला, दशहरा, दिवारी और न जानें कितने! बिचारे देवता सोते होंगे या इन त्यौहार’न कौ आनन्द लेते होमंगे?
देवता’न की तौ देवता जानें घुटरू, मानव तौ इन त्यौहार’न कौ पूरौ आनन्द लूटें हैं। सालभर अदृश्य-निद्रा में डूबे मानव त्यौहार’न के सीजन में जागृत अवस्था में आय जामें। तनबदन फुर्ती सों भर जामें। मर्द मांस काम-धंधे’न पै दुगने जोस सों लग जामें और घर की बैयरबानी हू अपने संग-संग घर की साज-सज्जा कौ हू खासौ ध्यान रखें। तरें-तरें के पकवान बनें। पूजापाठ होमें। हर तरफ हर्ष-उल्लास कौ वातावरण रहै।
मगर बत्तो पिछले अनेक बरस’न सों मैं देख रह्यौ हों कि जैसें ही अपने त्यौहार आमें हरतरफ मिलावटी मिठाई’न के समाचार दिखाई और सुनाई परवे लगें। दूध में मिलावट, खोआ में मिलावट, घी में मिलावट। मतलब हर चीज में मिलावट। कभू-कभू तौ ऐसौ लगै जैसें सालभर इन सब चीज’न में शुद्धता रहती होय और केवल अपने त्यौहार’न में ही नफा कमायवे के लिएं मुनाफाखोर मिलावट करते होंय!
अरे घुटरू का बात कर रह्यौ है। शुद्ध तौ अब जहर हू नांय मिलै। तोय का लगै सात-आठ सौ रुपैया में शुद्ध-घी मिल सवैâ? साठ रुपैया में शुद्ध-दूध मिल सवैâ? तू का समझै सागभाजी शुद्ध आय रही हैं? कपड़ा स्वास्थ्य कों ध्यान में रख कें बनाये जाय रहे हैं? नदी-कुआं शुद्ध हैं? हवा की तौ यै हालत है कि धुआं खतरनाक स्थिति के लेवल कों जुग्ग’न पहलें क्रॉस कर चुकौ है!
हां बत्तो मगर ये भले आदमी जो मिलावटी मिठाई की खबर छापें इन्हें कोल्डड्रिंक, चोकलेट जैसी चीज’’न के नुक्सान दिखाई नांय परें! इन्हें का दोस देंय, खुद्द अपुन हू तौ सब देख-भार कें हूं सूरदास बने भये हैं। अरे जब पतौ है कि मार्केट में एक किलो माल है और अपुन डिमांड दस किलो की रख दंगे तौ मिलावट तौ होनी ही है। ऊपर वारे नें बुद्धि सबकों दीनी है मगर सदुपयोग करै कौन? जब मालुम है कि खरीदौ भयौ जादातर माल वेस्ट होनों है, या इधर-विधर सिल्टानों ही है तौ पहले सों ही कम खरीद कें लाऔ नें! मगर वौ ही बात बुद्धि कौ सदुपयोग करै कौन?
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