-६ बड़े सरकारी अस्पतालों की जमीन पर किसके लिए बनने वाला है विश्राम गृह
-विपक्ष के निशाने पर महायुति, किसके इशारे पर लुटा रही खजाना
रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार के एक पैâसले ने सरकारी जमीनों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के छह प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के परिसर में धर्मशाला और विश्रामगृह बनाने के लिए गुजरात की एक संस्था को करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी जमीनें सिर्फ एक रुपए के वार्षिक नाममात्र किराए पर ४९ वर्षों के लिए देने का पैâसला किया गया है। मतलब करोड़ों की जमीन मात्र ४९ रुपए में ४९ साल के लिए दी गई है। सरकार के इस निर्णय को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर महाराष्ट्र की बेशकीमती सरकारी जमीन इतनी लंबी अवधि के लिए महज १ रुपए सालाना किराए पर क्यों दी जा रही है? शाह मंडली को यह जमीन किसके इशारे पर दी जा रही है।
राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी शासन निर्णय के अनुसार, अमदाबाद स्थित ‘सेवादान आरोग्य फाउंडेशन’ को राज्य के छह बड़े सरकारी अस्पतालों के परिसर में धर्मशाला और विश्रामगृह बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए संबंधित सरकारी जमीनें संस्था को ४९ साल की लीज पर उपलब्ध कराई जाएंगी और इसके बदले सरकार को हर साल महज १ रुपए का नाममात्र किराया मिलेगा।
करोड़ों की जमीन, महज १ रुपए सालाना किराया!
सरकार के इस पैâसले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन जमीनों की बाजार कीमत करोड़ों रुपए में है, उन्हें इतने लंबे समय के लिए महज १ रुपए सालाना किराए पर देने का औचित्य क्या है? क्या सरकार ने इस जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य, संभावित राजस्व और वैकल्पिक उपयोग का कोई आकलन किया है? अगर सरकारी जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा है तो भी ४९ वर्षों की इतनी लंबी लीज और महज १ रुपए सालाना किराए की शर्त को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
राज्य में पुणे के बी. जे. मेडिकल कॉलेज एवं ससून अस्पताल, मुंबई के सर जे. जे. समूह अस्पताल, नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर के शासकीय मेडिकल कॉलेज, यवतमाल के वसंतराव नाईक शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और कोल्हापुर के छत्रपति प्रमिलाराजे सर्वोपचार अस्पताल में करोड़ों की जमीन संस्था को दी जा रही है।
अमदाबाद के हर्षद शाह और मोहित शाह से जुड़े ‘सेवादान आरोग्य फाउंडेशन’ द्वारा धर्मशाला और विश्रामगृह बनाए जाने की बात शासन निर्णय में कही गई है। धर्मशाला का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के परिजनों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराना बताया गया है। शासन निर्णय में यह भी शर्त रखी गई है कि इन धर्मशालाओं का उपयोग केवल सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए होगा और जमीन का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक, कारोबारी या निजी उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा।
