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महायुति की ‘१०८’ भी बेदम!

-बेस्ट हादसे में एंबुलेंस नदारद, पुलिस वैन बनी सहारा
-लाश और घायलों को पुलिस वाहन से पहुंचाया अस्पताल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में हुए बेस्ट बस हादसे ने महायुति सरकार की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कई लोग घायल हुए, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि २४ घंटे सेवा का दावा करने वाली १०८ एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। मजबूरी में पुलिस को अपनी वैन में घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों के परिजनों के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद १०८ सेवा पर कई बार कॉल किए गए, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। सरकारी और निजी दोनों एम्बुलेंस सेवाओं से संपर्क किया गया, फिर भी समय पर कोई वाहन नहीं पहुंचा। हालात इतने बदतर थे कि पुलिस वाहन ही जीवनरक्षक साधन बन गया।
मुंबई में पूर्व और पश्चिम उपनगरों को मिलाकर १०८ एम्बुलेंस तैनात होने का दावा किया जाता है। मानखुर्द स्टेशन और शताब्दी अस्पताल जैसे प्रमुख स्थानों पर भी एम्बुलेंस उपलब्ध रहने की बात कही जाती है। इसके बावजूद हादसे के वक्त एक भी एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। १०८ सेवा के सेंट्रल कोऑर्डिनेटर डॉ. आशुतोष ने कहा कि रात करीब ८.३० बजे पहला कॉल आया था, लेकिन वह तत्काल रद्द कर दिया गया। दोबारा कॉल मिलने पर एम्बुलेंस भेजी गई, हालांकि ट्रैफिक जाम के कारण देरी हुई होगी। वहीं घायलों के परिजनों का सवाल है कि पहला कॉल किसने और क्यों रद्द किया? इसका स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिला है।
घायल अंकिता जाधव, रुक्मिणी घोरपड़े और लता वाघेला के परिजनों ने आरोप लगाया कि आठ लोग सड़क पर घायल पड़े थे, लेकिन कोई एम्बुलेंस मदद के लिए नहीं आई। पुलिस से गुहार लगाने के बाद उन्हें पुलिस वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों का यह भी आरोप है कि कुछ निजी एम्बुलेंस संचालकों ने मौके पर आने के लिए ६ से ७ हजार रुपये की मांग की।

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