फिरोज खान / मुंबई
दक्षिण मुंबई के पायधुनी से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही परिवार के ४ लोगों का जीवन रात में तरबूज खाने से ‘निष्फल’ हो गया। बताया जा रहा है कि तरबूज में जहरीला केमिकल था। वहीं ५ अन्य लोग उनके घर दावत पर आए थे पर उन्होंने तरबूज नहीं खाया और सिर्फ बिरयानी खाई थी इसलिए वे बाल-बाल बच गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
फलों में खतरनाक रसायनों का इंजेक्शन
तरबूज को लाल और मीठा बनाने के लिए जहरीले केमिकल लेड क्रोमेट, मेथनाल यलो व कार्बाइड आक्सीटाक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है। इन केमिकलों को इंजेक्शन द्वारा तरबूज में डाला जाता है। जानकारों का कहना है अगर गलती से भी केमिकल की मात्रा तरबूज में ज्यादा गई तो वह सीधे ब्रेन हैमरेज और लंग्स को फेल कर देता है और इंसान की मौत हो जाती है। मेथनाल की मात्रा ज्यादा होने पर यह फार्मिक एसिड में बदल जाता है और यह विषैला बन जाता है।
मृतकों के नाम
मृतकों में ४० वर्षीय पति, ३५ वर्षीय पत्नी और उनकी दो बेटियां, जिनकी उम्र १६ और १३ साल थी शामिल हैं। मृतकों की पहचान अब्दुल्ला डोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन डोकाडिया और उनकी बेटियों आयशा और जैनब के रूप में हुई है।
चूहा मार दवा से फलों की सुरक्षा
मालाड (पश्चिम) इलाके में २५ फरवरी २०२६ को फलों पर चूहे मारने वाली जहरीली दवा रेटोल लगाने का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने दो फल विक्रेताओं को पकड़ा था। ‘रेटोल’ में जिंक फॉस्फाइड जैसे बेहद जहरीले रसायन होते हैं, जो चूहों के साथ साथ इंसानों के लिए भी जानलेवा होते हैं।
४ का जीवन निष्फल!
– मुगल बिल्डिंग में हुआ हादसा
– तरबूज में जहर की आशंका
पायधुनी में रात को तरबूज खाने से एक ही परिवार के ४ लोगों की मौत हो गई। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि तरबूज जहरीला था। जानकारी के मुताबिक, २५ अप्रैल की रात परिवार ने अपने घर पर कुछ रिश्तेदारों को बुलाया था। कुल ९ लोगों ने मिलकर रात करीब साढ़े १० बजे बिरयानी खाई थी। खाना खाने के बाद रिश्तेदार अपने-अपने घर चले गए थे। इसके बाद देर रात करीब १ से १.३० बजे के बीच परिवार के चारों सदस्यों ने तरबूज खाया। इसके कुछ घंटों बाद ही उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी। चर्चा है कि तरबूज जहरीला था।
बता दें कि फलों में केमिकल पॉइजन का खतरनाक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी वजह से लोगों की आकस्मिक मौतें हो रही हैं। किसी का ब्रेन हैमरेज, तो किसी का लंग्स फेल होकर जान जा रही है। लोगों के अनुसार आम, केला, पपीता, चीकू को जल्दी पकाने के लिए जहरीले रसायन का उपयोग खुलेआम हो रहा है, आश्चर्य की बात यह है कि जनता की जान से खिलवाड़ होने के बावजूद सरकार और एफडीए खामोश बैठा हुआ है। तरबूज में केमिकल मिलाने का काम ज्यादातर संभाजी नगर, पुणे और मुंबई में किया जा रहा है।
खाने के बाद उल्टी-दस्त
पुलिस के मुताबिक, परिवार ने अपने रिश्तेदारों के साथ खाना खाया और अगले दिन उन्हें उल्टी और दस्त होने लगे। इसके बाद जब वे अपने पैâमिली डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने उन्हें जे.जे. अस्पताल जाने की सलाह दी। मौत से पहले परिवार के एक सदस्य ने पुलिस को बताया कि उन्होंने साथ में बिरयानी खाई थी और फिर तरबूज खाया था। पायधुनी इलाके में घाची गली में मुगल बिल्डिंग में रहने वाले डोकाडिया की दोनों बेटियां पहले बेहोश हो गईं। उसके बाद उनके माता-पिता भी सिरियस हो गए।
ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतजार
चारों शवों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, मौत का सही कारण ऑटोप्सी रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। आंतों से लिए गए खाने के सैंपल मेडिकल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
