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केंद्र के खिलाफ फूटा बुजुर्गों का गुस्सा … मोदी जी, हमसे राहत क्यों छीनी?

रेल रियायतें बंद करने पर घिरी सरकार वरिष्ठ नागरिकों ने की तुरंत बहाली की मांग

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र सरकार द्वारा रेलवे किराए में दी जाने वाली रियायत को बंद किए जाने के पैâसले के खिलाफ देशभर के बुजुर्गों में भारी गुस्सा है। वरिष्ठ नागरिकों ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि सरकार के इस पैâसले ने उन्हें आर्थिक रूप से असहाय बना दिया है।
बता दें कि कोविड-१९ महामारी से पहले भारतीय रेलवे बुजुर्गों को यात्रा में बड़ी राहत देती थी। तब ५८ वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को किराए में ५० प्रतिशत और ६० वर्ष से अधिक के पुरुषों को ४० प्रतिशत की छूट मिलती थी। महामारी का दौर बीत जाने के लंबे समय बाद भी मोदी सरकार ने इस सुविधा को बहाल नहीं किया है, जिसे बुजुर्ग अपना अपमान और अपने साथ हुआ अन्याय मान रहे हैं। बुजुर्गों ने सरकार को याद दिलाया कि वे राष्ट्र की संपत्ति हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के निर्माण में लगाया है। ऐसे में पिछली सरकारों द्वारा दी गई एक सम्मानजनक सुविधा को छीन लेना किसी भी तरह से उचित नहीं है।

बुजुर्गों का देशव्यापी विरोध तेज
बुजुर्गों का कहना है कि रेल रियायत केवल पैसों की बचत नहीं थी, बल्कि यह उनके प्रति समाज और सरकार के सम्मान का प्रतीक थी। देश के लाखों वरिष्ठ नागरिक आज भी इस उम्मीद में हैं कि प्रधानमंत्री उनकी भावनाओं को समझेंगे और इस सुविधा को दोबारा शुरू करेंगे। बुजुर्गों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार जल्द ही रेल किराए में छूट बहाल नहीं करती है, तो उनका यह विरोध और अधिक तीव्र हो सकता है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस `गुस्से’ को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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