सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति राज में भ्रष्टाचार की नई कहानी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। इसके तहत एसटी महामंडल में ग्रेच्युटी के नाम पर बड़े खेल हुए हैं। इस खेल में रिटायर कर्मचारियों को उनका हक समय पर देने के बजाय सालों तक लटकाया गया, जिसके चलते कोर्ट के आदेश के बाद महामंडल को करोड़ों रुपए ब्याज के रूप में चुकाने पड़े। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में ६३ अधिकारी जांच के घेरे में हैं। एसटी महामंडल को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए प्रशासन की ओर से कई उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर अधिकारियों की लापरवाही और कथित गड़बड़ियों के कारण आर्थिक बोझ बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। एसटी महामंडल में सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि २६ विभागों के करीब ४८० सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अदालत के आदेश के बाद दो वर्षों में लगभग ढाई करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाने पड़े। यह आरोप महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने लगाया है। उन्होंने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल ६३ अधिकारियों से यह रकम वसूल की जाए। महामंडल में कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी फंड की व्यवस्था है, जिसके तहत सेवानिवृत्ति के ३० दिनों के भीतर ग्रेच्युटी देना अनिवार्य होता है। हालांकि, हर वर्ष २४० दिनों की उपस्थिति की शर्त लागू होती है या नहीं, इसे लेकर भ्रम बना हुआ है। साथ ही, नौकरी की शुरुआत में दैनिक वेतन पर किए गए काम को शामिल किया जाए या नहीं, इस पर भी स्पष्टता नहीं है। कई मामलों में कर्मचारी द्वारा ग्रेच्युटी की मांग न करने पर फाइलें लंबित पड़ी रहती हैं।
