सामना संवाददाता / मुंबई
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की तिजोरी पर बड़े प्रकल्पों का दबाव बढ़ रहा है। बीएमसी की नवीनतम तिमाही वित्तीय रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित खबर के अनुसार, आठ महीनों में उसके वित्तीय भंडार में ३,५४४ करोड़ रुपए की कमी आई है। विभिन्न बैंकों में सावधि जमा के रूप में रखी राशि ८१,४४९ करोड़ रुपए से घटकर ७७,९०५ करोड़ रुपए रह गई है। चिंता केवल जमा घटने की नहीं है। बीएमसी की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताएं लगभग २.३४ लाख करोड़ रुपए हैं। वहीं, उपलब्ध भंडार का करीब आधा हिस्सा ही विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। शेष राशि कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और ठेकेदारों की सुरक्षा जमा जैसी देनदारियों से जुड़ी है। एक मनपा अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर आने वाले वर्षों में नकदी संकट की आशंका जताई है। हालांकि, संपत्ति कर और भवन प्रस्ताव विभाग से आय बढ़ने के कारण चालू वर्ष में वित्तीय तंगी की संभावना नहीं बताई गई है।
बड़े प्रकल्पों के साथ अब वित्तीय अनुशासन का सवाल भी बड़ा हो गया है; खर्च और प्रतिबद्धताओं पर नियंत्रण कैसे होगा? मुंबईकरों को विकास के साथ यह हिसाब भी चाहिए कि आवश्यक नागरिक सेवाओं के लिए पर्याप्त पैसा कैसे सुरक्षित रहेगा।
एफडी का ढिंढोरा पीटने वाली मनपा सुन ले, यह तुम्हारी कमाई नहीं!
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के वरिष्ठ नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि मनपा कोई मुनाफा कमाने वाली निजी कंपनी नहीं है। मनपा के पास हजारों करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट होने का जो ढिंढोरा पीटा जाता है, असल में वह पैसा ठेकेदारों की अमानत राशि (ईएमडी) का है। उन्होंने कहा, `मनपा कोई व्यापारिक कंपनी नहीं है जो मुनाफा कमाए।
