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दिल्ली के व्यापारी पहुंचे हाई कोर्ट, पुलिस की पाबंदियों पर सवाल… प्रदर्शन रोकने की कीमत २,००० करोड़ रुपए?

 सामना संवाददाता / नई दिल्ली

राजधानी में प्रदर्शनों के बीच लगी बैरिकेडिंग और आवाजाही संबंधी पाबंदियों का असर अब व्यापारियों की रोजी-रोटी पर पड़ने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ताओं ने लगभग २,००० करोड़ रुपए के कारोबारी नुकसान का दावा करते हुए प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों पर मानक संचालन प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।
मंगलवार सुबह दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाओं की तत्काल सुनवाई की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि प्रतिबंधों और व्यवधानों से व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच प्रभावित हुई है। मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा दिशा-निर्देश लागू हों, ताकि व्यापार, आवाजाही और वकीलों का काम बाधित न हो।
अदालत ने केंद्र का पक्ष मांगा और सुप्रीम कोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही के दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। पीठ ने फिलहाल अंतरिम निर्देश देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई १६ अक्टूबर तय की। सवाल है; प्रदर्शन नियंत्रित करने की प्रशासनिक व्यवस्था में बाजारों तक पहुंच बाधित होने की कीमत दुकानदार क्यों चुकाएं? विरोध का अधिकार और रोजी-रोटी, दोनों की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि, २,००० करोड़ रुपए के नुकसान का आंकड़ा याचिकाकर्ताओं का दावा है; अदालत ने इसे प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना है।

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