-हर दिन १९ लोग बन रहे शिकार…९ महीनों में मरीजों की संख्या ५ हजार पार
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका का पशु चिकित्सा विभाग भले ही आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनपा संचालित केंद्रों के आंकड़ों को देखें तो अब शहर में हर रोज औसतन १९ लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। चालू वर्ष २०२६ में जनवरी से लेकर सितंबर तक (९ महीनों में) मनपा संचालित स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल ५,२१९ डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी सरकारी अस्पताल में हर महीने आने वाले लगभग १०० मामलों को जोड़ें तो हर दिन कुत्तों का शिकार बनने वाले लोगों की औसतन संख्या २२ तक पहुंच जाती है। यह संख्या केवल सरकारी और मनपा संस्थानों की है; निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराने वाले सैकड़ों अनरिपोर्टेड (गैर-पंजीकृत) मामले इसमें शामिल नहीं हैं। कुत्तों का शिकार होने वालों में सबसे अधिक संख्या मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की है। उल्लेखनीय है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए मनपा ने साल २००४ में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) परियोजना के तहत ५ वर्षों के भीतर शत-प्रतिशत ‘जीरो ब्रीडिंग’ का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस योजना के शुरू होने के २२ साल बाद भी यह नागरिकों के लिए एक दूर का सपना बनी हुई है।
वर्ष २०२६ में माहवार डॉग बाइट के मामले (मनपा केंद्र)
जनवरी: ६४७
फरवरी: ५८६
मार्च: ७३९
अप्रैल: ६०१
मई: ६१७
जून: ५६०
जुलाई: ५७२
अगस्त: ३८३
सितंबर: ५१४
मनपा केंद्रों के कुल मामले: ५,२१९
समान अवधि में कुल नसबंदी: ३,०१६
