-गंभीर और आकस्मिक उकसावे पर हमला या आपराधिक बल, अपहरण तथा व्यपहरण
एड. कनई बिस्वास
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा को विशेष संरक्षण प्रदान करती है। कानून यह भी स्वीकार करता है कि कुछ परिस्थितियों में अचानक और गंभीर उकसावे के कारण हमला हो सकता है, लेकिन साथ ही किसी व्यक्ति को उसकी विधिक अभिरक्षा से ले जाना या बल अथवा छल के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना गंभीर अपराध है। धारा १३६, १३७ और १३८ इन्हीं अपराधों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी – १: ‘गंभीर और आकस्मिक उकसावे पर हमला या आपराधिक बल’ (धारा १३६)
दो व्यक्तियों के बीच अचानक विवाद हो गया। बहस के दौरान एक व्यक्ति ने दूसरे को गंभीर रूप से अपमानित कर दिया। उसी क्षण आवेश में आकर दूसरे व्यक्ति ने उसे धक्का दे दिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी को गंभीर और आकस्मिक उकसावा मिला था?
क्या हमला उसी आवेश में किया गया था?
क्या घटना पूर्व नियोजित नहीं थी?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि हमला गंभीर और आकस्मिक उकसावे के कारण तत्काल हुआ था तो मामला धारा १३६ के अंतर्गत आएगा। समझें: धारा १३६ के अनुसार गंभीर और आकस्मिक उकसावे की स्थिति में किए गए हमला या आपराधिक बल के मामलों का मूल्यांकन सामान्य परिस्थितियों से अलग किया जाता है। न्यायालय प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर निर्णय करता है।
केस स्टडी – २: ‘अपहरण’ (धारा १३७)
एक व्यक्ति १५ वर्षीय किशोर को उसके अभिभावकों की अनुमति के बिना बहला-फुसलाकर दूसरे शहर ले गया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित विधिक आयु से कम था या विधिक संरक्षक की अभिरक्षा में था?
क्या उसे विधिक संरक्षक की अनुमति के बिना ले जाया गया?
क्या घटना के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
फैसला – यह अपहरण का मामला है।
समझें: धारा १३७ के अनुसार, किसी नाबालिग या विधिक रूप से संरक्षित व्यक्ति को उसके वैध संरक्षक की अनुमति के बिना अपने साथ ले जाना या ले जाने के लिए प्रेरित करना अपहरण कहलाता है और यह दंडनीय अपराध है।
केस स्टडी – ३: ‘व्यपहरण’ (धारा १३८)
कुछ लोगों ने एक व्यापारी को धमकी देकर जबरन कार में बैठाया और उसे दूसरे स्थान पर ले गए।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित को बल, धमकी या छल से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया गया?
क्या आरोपी का उद्देश्य गैर-कानूनी था?
क्या घटना के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
फैसला- यह व्यपहरण का मामला है। समझें: धारा १३८ के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को बल प्रयोग या छल-कपट के माध्यम से उसकी इच्छा के विरुद्ध एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है तो यह व्यपहरण कहलाता है। अपराध की प्रकृति और उद्देश्य के अनुसार आगे की धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने और आने-जाने का अधिकार है। किसी व्यक्ति को बल, धमकी या छल से उसकी स्वतंत्रता से वंचित करना कानून की दृष्टि में गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
(अगले अंक में: धारा १३९, १४० और १४१ – ‘भीख मंगवाने के लिए बच्चे का अपहरण या अंग-भंग करना, हत्या या फिरौती के उद्देश्य से अपहरण तथा विदेश से लड़के या लड़की को भारत लाना’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
