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सीयूएसबी में नवगठित संस्थागत नैतिकता समिति की पहली बैठक आयोजित

अनिल मिश्र / पटना

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) की जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान संबंधी संस्थागत नैतिकता समिति (आईईसीबीएचआर) की नवगठित समिति की पहली बैठक डॉ. कृष्ण पांडेय, निदेशक एवं वैज्ञानिक-जी, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-आरएमआरआईएमएस), पटना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में नवगठित समिति के सदस्यों सहित प्रो. मनीष मंडल, शल्य जठरांत्र विज्ञान एवं यकृत प्रत्यारोपण विभाग, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस), पटना; प्रो. राकेश कुमार, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, आईजीआईएमएस, पटना; प्रो. संतोष कुमार, जैवरसायन विभाग, एनएमसीएच, पटना; डॉ. विनय कुमार तिवारी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), वास्तु विहार बायोटेक, बोधगया, गया तथा सीयूएसबी के प्रोफेसरों ने भाग लिया। समिति ने नैतिक समीक्षा तथा उत्तरदायी जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।समिति के सदस्यों ने सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के साथ भी संवाद किया। कुलपति प्रो सिंह ने गया एवं इसके आसपास के जिलों की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोगात्मक एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से कुपोषण से संबंधित रोगों, क्षय रोग (टीबी), मस्तिष्कावरण शोथ (मेनिन्जाइटिस) तथा क्षेत्र में बढ़ते यकृत रोगों, जिनमें यकृत कैंसर एवं यकृत फोड़ा शामिल हैं, से संबंधित सहयोगात्मक अनुसंधान की संभावनाओं का पता लगाने पर बल दिया।इस संबंध में दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी)के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि बैठक का समन्वय प्रो. रिजवानुल हक, अधिष्ठाता, पृथ्वी, जैविक एवं पर्यावरणीय विज्ञान विद्यालय (एसईबीईएस), सीयूएसबी तथा डॉ. अमृता श्रीवास्तव, जीवन विज्ञान विभाग, सीयूएसबी एवं सचिव, जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान संबंधी संस्थागत नैतिकता समिति (आईईसीबीएचआर) द्वारा किया गया। इस संवाद के दौरान स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों एवं उद्योग जगत की सहभागिता से बहुविषयक तथा समुदाय-केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करने के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

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