हिमांशु राज
बीते अगस्त 2026 में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) में भयंकर अंदरूनी कलह सामने आई, जिसके बाद तब की महासचिव उपासना सिंह समेत 11 कार्यकारी समिति सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। उपासना ने नेतृत्व पर ‘अपमान’, ‘एकतरफा फैसले’ और ‘संगठन का निजी प्रचार के लिए दुरुपयोग’ जैसे गंभीर आरोप लगाए।
उपासना सिंह ने खुलेआम कहा कि उन्हें और अन्य सदस्यों को नीचा दिखाया गया; उन्हें ‘ऐरा-गैरा’ और महज ‘कैरेक्टर आर्टिस्ट’ कहकर संबोधित किया गया। उन्होंने इसे संगठनात्मक संस्कृति के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि ऐसे व्यवहार के बाद वे पद पर नहीं रह सकतीं।
उपासना ने CINTAA अध्यक्ष पूनम ढिल्लन और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे पर संगठन का मंच केवल अपनी व्यक्तिगत पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की तस्वीरों में अन्य सदस्यों को काटकर केवल इन दोनों को हाईलाइट किया जाता है। साथ ही, उन्होंने नेतृत्व पर ‘तानाशाही’ चलाने और असहमत सदस्यों को शो-कॉज नोटिस भेजने का भी आरोप लगाया—दावा किया कि जो सदस्य ‘जी हां, मैडम’ नहीं कहते, उन्हें निशाना बनाया जाता है।
उपासना सिंह के अनुसार, कुल 21 सदस्यीय कार्यकारिणी में से 11 सदस्यों (जिनमें 8 निर्वाचित सदस्य शामिल थे) ने इस्तीफा दे दिया। उनका तर्क था कि CINTAA के संविधान के क्लॉज 18(F)(iii) के तहत यदि 50% या अधिक सदस्य चले जाएं तो समिति स्वतः भंग हो जाती है और नए चुनाव अनिवार्य हैं। इसी आधार पर उन्होंने 11 इस्तीफों के बाद बनी नई समिति को ‘अवैध’ करार दिया।
इस विवाद में दिग्गज अभिनेत्री कुनिका सदानंद भी उपासना सिंह के समर्थन में सामने आईं, न्यायालय का आदेश आने पर उपासना ने मीडिया के समक्ष ‘सत्यमेव जयते’ कह कर न्यायालय के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। कुनिका ने साफ कहा कि वे CINTAA की सदस्य हैं और उपासना के साथ खड़ी होने आई हैं; उन्होंने अंदरूनी कलह को सार्वजनिक मंच पर उजागर करने का समर्थन किया।
पूनम ढिल्लन और पद्मिनी कोल्हापुरे ने इन सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया। पूनम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “उपासना सिंह के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं; हर रुपए का हिसाब है और कोई निजी लाभ नहीं हुआ।” पद्मिनी ने भी कहा कि आरोप सत्य नहीं हैं।
विवाद इतना बढ़ा कि FWICE (फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज) को हस्तक्षेप करना पड़ा। FWICE ने तर्क दिया कि आधे से अधिक सदस्यों के इस्तीफे के बाद समिति का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो गया है, इसलिए 12 सितंबर 2026 को नए चुनाव कराए जाएंगे। अदालत ने चुनाव पर रोक देने से इनकार कर दिया, जिससे प्रक्रिया आगे बढ़ी।
