-एक लाख दो अनुदान- अंतरजातीय विवाह का हो प्रावधान
– महायुति सरकार में कुंवारों की गुहार
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में युवाओं के सामने रोजगार, महंगाई और शिक्षा के बाद अब विवाह का संकट भी सामाजिक समस्या का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक युवक ने अपनी शादी कराने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय के सामने ऐसा आंदोलन शुरू किया है। उनकी मांग है कि सरकार युवाओं के विवाह के लिए एक लाख रुपए का अनुदान दे और समाज कल्याण विभाग के माध्यम से पूरे महाराष्ट्र में सभी धर्मों के विवाह पंजीकरण के लिए सरकारी ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवस्था शुरू करे। सबसे जरूरी है कि सरकार लोगों की शादी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
युवक किसानदेव ननवरे दूल्हे का फेटा और मुंडावली पहनकर जिला मुख्यालय के सामने आंदोलन पर बैठ गए हैं। डिजिटल बोर्ड लगाकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि ग्रामीण महाराष्ट्र के अनेक युवाओं की उम्र ३५ वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन विवाह नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सरकार को इस समस्या को केवल व्यक्तिगत मामला मानने के बजाय सामाजिक समस्या के रूप में देखना चाहिए।
अब विवाह के लिए लड़कियां नहीं!
इस पूरे संकट की एक बड़ी वजह महाराष्ट्र में घटता लिंगानुपात भी बताया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही ‘बेटा चाहिए, बेटी नहीं’ जैसी मानसिकता, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों ने समाज का संतुलन बिगाड़ा है। जिस समाज ने बेटियों को जन्म लेने से रोका, उसी समाज में आज विवाह योग्य युवाओं को जीवनसाथी नहीं मिल रहा है। यह केवल किसी एक युवक की समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही सामाजिक और सरकारी विफलताओं का परिणाम है।
महायुति सरकार युवाओं के लिए रोजगार, विकास और आर्थिक अवसरों के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन यदि ग्रामीण महाराष्ट्र का युवा अपनी शादी के लिए ‘एक लाख रुपए दो और मेरी शादी करवाओ’ की मांग लेकर सरकारी कार्यालय के सामने बैठने को मजबूर हैं।
